भाजपा की चार्जशीट बनी नेताओं के गले की फांस, खुद ही उठा रहे आरोपों की सत्यता पर सवाल
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भाजपा की ओर से कांग्रेस सरकार के मंत्रियों और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ राज्यपाल को सौंपी चार्जशीट अब उसी के लिए गले की फांस बन गई है। वीरभद्र सरकार में मंत्री रहे अनिल शर्मा के खिलाफ बीजेपी ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए इस चार्जशीट के जरिये जांच की मांग की थी,
लेकिन ऐन चुनावों से पहले मंत्री अनिल शर्मा ने मंत्री पद से इस्तीफा दे भाजपा का दामन थाम लिया। अब सूबे में प्रचार के लिए आने वाले नेताओं से चार्जशीट की जांच कराने का सवाल पूछने पर वह गोलमोल जवाब दे रहे हैं।
शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव जेपी नड्डा से जब चार्जशीट को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर चार्जशीट की जांच की जाएगी। यह भी जोड़ा कि तथ्यों के आधार पर आरोपों की जांच होगी।
नड्डा ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर खड़े किए सवाल
नड्डा ने यह तर्क देकर अपनी ही पार्टी के उन नेताओं की चार्जशीट की सत्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन्होंने चार्जशीट राज्यपाल को सौंपने के बाद सरकार बनने पर हर हाल में इसकी जांच कराने की बात कही थी।
यही नहीं, भाजपा नेताओं का यह भी दावा था कि इस चार्जशीट में लगे सभी आरोप एकदम सत्य है। ऐसे में अब अनिल शर्मा के भाजपा में शामिल होने के बाद खुद भाजपा नेता ही चार्जशीट में लगे आरोपों की सत्यता पर परोक्ष रूप से सवाल उठा रहे हैं।
पात्रा भी नहीं दे सके थे जवाब
कुछ दिन पहले पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा से भी यही सवाल किया गया। उस दौरान वह भी असहज हो गए और चार्जशीट पर जवाब देने से बचते दिखे। चार्जशीट की जांच के बजाय उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके बेटे व युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह की जांच कराने की बात कह अपनी प्रेसवार्ता खत्म कर दी थी।