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मंडी सदर सीट से कौल सिंह की बेटी दे रही सुखराम के बेटे को कड़ी टक्कर
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, मंडी
Updated Wed, 08 Nov 2017 01:44 PM IST
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पौ फटते ही मंडी शहर पर ब्यास नदी से उठी वाष्प से धुंध के बादल बन गए हैं। सूर्य की किरणों की चपेट में आते ही ये कुहासा छंट जाता है। अब रास्तों-सड़कों से लेकर दुकानों-हाटों पर चुनावी चर्चा का बाजार गरम है।
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यहां पंडित सुखराम के लड़के और कौल सिंह की लड़की में होने जा रहे मुकाबले के ही चर्चे है। चर्चाओं में निचोड़ निकल रहा है कि चंपा ठाकुर ने वीरभद्र सरकार का हाल ही में दामन छोड़ने के बाद मंत्री अनिल शर्मा को कड़ी चुनौती दे डाली है।
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सवेरे 10 बजे ही मंडी शहर में एक दुकान पर सेवानिवृत्त कला शिक्षक भूप सिंह, एसएसबी के रिटायर डीआईजी आरके शर्मा, हिमुडा के रिटायर हो चुके सहायक इंजीनियर मुरालीलाल शर्मा और श्रवण कुमार में चुनावी गपशप को जुट चुके हैं।
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इन तमाम समस्याओं को गिनाते इन वरिष्ठजनों से जब पूछा गया कि मंडी सदर सीट में क्या चुनावी हाल हैं तो जवाब मिला कि दोनों में कड़ी टक्कर है। चंपा ठाकुर अनिल शर्मा के बेटे के लिए चुनौती बन गई है।
दोपहर के 12 बज चुके हैं। मंडी में टैक्सी के लिए सवारी का इंतजार कर रहे हैं हिमांशु। किसकी सरकार आ रही है? वे इसके जवाब में कहते हैं - तां गल ऐड़ी सरकार आवो जो मरजी ऐते नीं ओहणा कुछ बी।
असो खाणा पौणे धक्के। (यानी बात ऐसी है कि सरकार जो मर्जी आए, यहां कुछ नहीं होने वाला। हमें तो धक्के ही खाने पड़ेंगे।) उन्होंने कहा कि मंडी को छोटी काशी कहते हैं। यहां इतने मंदिर हैं कि दो दिन तक चलकर भी ये पूरे नहीं होंगे। पर पर्यटक यहां से सीधा मनाली भागता है। यहां पर्यटन के लिए किसी सरकार ने कुछ नहीं किया।
पंडोह से कड़कोह तक फैली ये सीट
बाजार में लाउड स्पीकर का शोर-शराबा जब तब प्रकट हो जाता है। ये स्पीकर प्रत्याशियों के पोस्टरों से सजीं गाडि़यों पर लगे हुए हैं। इनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही जोर लगाया हुआ है। श्रवण कुमार बताते हैं कि इस सीट का दायरा काफी लंबा-चौड़ा है। लंबाई में ये सीट पंडोह से कड़कोह तक फैली हुई है।
सात उम्मीदवार हैं मैदान में, चार निर्दलीय भी
मंडी सदर सीट पर कहने को तो सात उम्मीदवार मैदान में हैं। अनिल शर्मा और चंपा ठाकुर के अलावा ये बसपा से नरेंद्र कुमार के अलावा चार निर्दलीय उम्मीदवार दुनीचंद, देशराज, रोशनी शर्मा और लवण ठाकुर हैं। इन सबका प्रचार चला हुआ है।
जिला परिषद वार्डों में अच्छी पकड़ है चंपा की, अनिल की पूंजी पिता पंडित सुखराम
इस सीट पर दो बड़े महारथियों के ‘बेटे-बेटी’ में मुकाबला है। पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पंडित सुखराम के बेटे अनिल शर्मा ने हाल में वीरभद्र सरकार के मंत्री रहते कांग्रेस को झटका देते हुए भाजपा का दामन थामा है।
इस अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम के बीच स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर अपनी बेटी चंपा ठाकुर को टिकट झटकने में कामयाब हुए तो सही, मगर बेटी को विधानसभा की दहलीज के भीतर पहुंचाने को उनकी चुनौती कम नहीं है।
कुछ स्थानीय निवासी बोले - साथ लगती द्रंग सीट में खुद उलझे होने के कारण कौल सिंह बेटी के लिए ज्यादा वक्त भी नहीं निकाल पा रहे। अनिल शर्मा के पास सबसे बड़ी पूंजी अपने पिता पंडित सुखराम का सियासी रसूख है तो चंपा ठाकुर कौल सिंह की पुत्री होने के साथ दो जिला परिषद वार्डों में अच्छी-खासी पकड़ रखती हैं। वे महिला वोटरों का कार्ड भी चल रही हैं।
मैं आया राम गया राम नहीं हूं
बल्ह सीट की सीमा की दिशा में मंडी के एक सीमावर्ती ढाबे पर युवकों की गोष्ठी जमी हुई है। ये भी चुनावी चर्चा कर रहे हैं। इनमें से एक युवक बोला- मैं आया राम गया राम नहीं हूं। मैं जन्मजात भाजपा का बंदा हूं, मगर अनिल शर्मा वोट मांगे तो दस बार सोचूंगा।
शिमला अंदर गुडि़या कांडा रा क्या हुआ। होणा कुछ कि नेईं
मंडी में एक युवक महेंद्र सिंह से जब चुनावी समीकरणों पर बात की तो उसने पूछा - अच्छा आप शिमला से कवर करने आए हो... शिमला अंदर गुडि़या कांडा रा क्या हुआ। होणा कुछ कि नेईं। आगे वह हिंदी में बोला - कोई कुछ नहीं करेगा।
समस्याओं का भी कुछ सोचें
सेवानिवृत्त शिक्षक भूप सिंह कहते हैं कि मंडी सदर में ये जो बाहरी लोग झुग्गियों-झोपडि़यों में रहते हैं। इनका किसी ने नहीं सोचा। इनमें कई तो वोटर भी बना दिए गए हैं। इनकी संख्या हजारों में पहुंचने लगी है। श्रवण कुमार कहते हैं कि मंडी शहर में लावारिस पशुओं की बड़ी दिक्कत हैं।
सड़कों पर घूमते गाय-बैल अनेक बार दुर्घटना का कारण बनते हैं। सड़कों पर घूमते आवारा कुत्तों ने भी कई बार लोगों को काट डाला है। भवनों-सड़कों पर यहां-वहां उछलते बंदर भी नुकसान कर रहे हैं। कोई इस बारे में सोचे तो बात बने।