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हिमाचली बागवानों को हर साल करोड़ों का चूना लगा रहे आढ़ती

Sun, 16 Jun 2019 12:17 PM IST
Krishan Singh विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 16 Jun 2019 12:17 PM IST
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Himachal apple growers exploitation by Buyers
फाइल फोटो

हिमाचल में हर साल साढ़े चार हजार करोड़ के सेब कारोबार से जुड़े बाहरी राज्यों के लदानी और आढ़तियों पर नकेल कसने को सरकार ने कोई ठोस कानून नहीं बनाया है। ऐसी ही स्थिति बनी रही तो इन बेलगाम आढ़तियों के हाथों हजारों बागवानों का आर्थिक शोषण कैसे रुकेगा?

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बागवानों को हर साल बाहरी आढ़ती करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। गिनती के केस पुलिस तक पहुंचते हैं। मध्यम और छोटे बागवान तो कुछ बोल भी नहीं पाते। आज दिन तक यही कुछ हो रहा है। 
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सेब सीजन से पहले हिमाचल के विभिन्न हिस्सों में लदानी धनराशि लेकर सेब खरीदने पहुंचते हैं। लदानी और आढ़ती बागवानों का विश्वास जीतकर पिछले कई सालों से ऐसा कर रहे हैं।
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एक दो बार तो भुगतान कर दिया जाता है और जब ज्यादा सेब खरीदते हैं तो धनराशि के भुगतान से पहले खरीदार गायब हो जाते हैं। पिछले साल खरीदे सेब का भुगतान न करने वाले लदानियों को दबोचने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, लेकिन अभी कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी है।  

आढ़तियों और लदानियों पर नकेल नहीं: हरीश

Himachal apple growers exploitation by Buyers
फाइल फोटो

प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि सरकार ने आढ़तियों और लदानियों पर कोई नकेल नहीं कसी है। सेब कारोबार से जुड़े आढ़तियों और लदानियों का पंजीकरण और सिक्योरिटी राशि 25 से 30 लाख तक ली जाए। पंजीकरण के समय व्यापारी का आधार नंबर भी जरूर लें। तभी जाकर बागवानों का आर्थिक शोषण रुक सकेगा।

कानून बनाने पर विचार कर रही सरकार : मारकंडा
कृषि मंत्री राम लाल मारकंडा कहते हैं कि अभी तक आढ़तियों और लदानियों पर शिकंजा कसने को कोई कानून नहीं हैं। इनका पंजीकरण करना और सिक्योरिटी राशि जमा कराने की व्यवस्था नहीं है। सरकार शीघ्र सेब और अन्य फलों का कारोबार करने वाले व्यापारियों पर नकेल कसने को कानून बनाने पर विचार कर रही है। बागवानों को धोखा देने वाले व्यापारियों से धनराशि की रिकवरी की जा सके। 

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