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किसाऊ बांध पर हिमाचल, उत्तराखंड दो-दो हाथ

Mon, 19 Jan 2015 11:57 AM IST
Updated Mon, 19 Jan 2015 11:57 AM IST
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Himachal and Uttarakhand yet not signed MoU for Kishau Dam Project.

देश के दो कांग्रेस शासित राज्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड प्रस्तावित किसाऊ बांध पर केंद्र की सुनने को तैयार नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव के निर्देश के बावजूद दोनों ही राज्य एमओयू नहीं कर पा रहे हैं। इससे सीधे तौर पर 660 मेगावाट के पावर प्रोजेक्ट और छह राज्यों के भावी पेयजल योजना पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है।

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सितंबर 2014 में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव ऊर्जा के बीच बैठक हुई थी। बैठक में एक माह के भीतर एमओयू करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद एक दौर की बैठक शिमला में हुई, जिसमें उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्य सचिव सुभाष कुमार और अन्य अधिकारी शामिल हुए थे।

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उत्तराखंड ने नहीं दिया कोई जबाव

Himachal and Uttarakhand yet not signed MoU for Kishau Dam Project.

उस बैठक के बाद हिमाचल प्रदेश ने अपने तरह से एक प्रस्ताव बनाकर उत्तराखंड को भेज दिया। बैठक के लिए समय मांगा, लेकिन पिछले दो माह से अधिक समय से उत्तराखंड की ओर से कोई समय नहीं दिया गया। उत्तराखंड की ओर से देहरादून में बैठक करने का हिमाचल प्रदेश इंतजार कर रहा है।

सूत्रों का कहना है कि एक-दो ऐसे मामले हैं, जिसको लेकर दोनों ही कांग्रेस शासित राज्य अड़े हुए हैं। मुख्य सचिव ने बताया कि हिमाचल ने एमओयू करने के लिए प्रस्ताव बनाकर उत्तराखंड को भेज दिया है। अब उत्तराखंड की जिम्मेदारी है कि वह बैठक बुलाकर एमओयू की दिशा में पहल करे।

660 मेगावाट का है पावर प्रोजेक्ट

Himachal and Uttarakhand yet not signed MoU for Kishau Dam Project.

हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर 660 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट बनना है। इसे यूपीए सरकार ने ही राष्ट्रीय प्रोजेक्ट घोषित कर दिया था। अब मोदी सरकार प्रोजेक्ट पर 90 फीसदी बजट खर्च करने को तैयार है। जबकि 10 फीसदी रकम हिमाचल और उत्तराखंड को मिलकर खर्च करना है। अनुमान के अनुसार इस पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होने है।

क्यों अटकी बात-
हिमाचल ने पक्ष रखा है कि निर्माण के दौरान जो सामग्री की खरीददारी की जाएगी। उस पर अरबों रुपये उत्तराखंड को वैट मिलेगा। उसका 50 फीसदी हिस्सा हिमाचल को भी देय हो। हिमाचल की सीमा पर पहले से जो तीन विद्युत परियोजनाएं है। किसाऊ बांध बनने के बाद उनकी क्षमता बढ़ जाएगी। उसका भी हिमाचल को हिस्सा दिया जाए, लेकिन इसे मानने को उत्तराखंड तैयार नहीं है।

क्या होगा फायदा-
किसाऊ बांध के बनने से हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के छह राज्यों को पेयजल की आपूर्ति आसान हो जाएगी। इसके अलावा पावर प्रोजेक्ट बनने से हिमाचल और उत्तराखंड के बीच 50-50 फीसदी की हिस्सेदार मिलेगी। इससे दोनों राज्यों को लाभ होगा।

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