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हिमाचल: समय पर सेब तुड़ान न हुआ तो 50 फीसदी फसल होगी तबाह

Thu, 16 Jul 2020 11:48 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 16 Jul 2020 11:48 AM IST
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Himachal: 50 percent crop will be destroyed if apple is not harvested in time
सेब सीजन हिमाचल - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल के सेब कारोबार पर अव्यवस्थाओं की मार पड़ने लगी है। सरकार पहले कह रही थी कि सेब सीजन से पहले सभी व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी लेकिन सीजन आते ही बागवानों को अपने ही हाल पर छोड़ दिया है। हफ्ते में सेब सीजन रफ्तार पकड़ने वाला है परंतु सेब तुड़ान और ढुलाई के लिए नेपाली लेबर का इंतजाम तक नहीं किया जा सका। बागवानों को चिंता सता रही है कि हिमाचल में समय पर सेब तुड़ान न हुआ तो 50 फीसदी फसल बगीचों में ही तबाह हो जाएगी।

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क्या कहते हैं बागवान
 जिला शिमला के जुब्बल शराचली के सेब बागवान प्रदीप बाल्टू कहते हैं कि अभी तो टाइडमैन सेब जैसे तैसे मंडियों में बेच दिया है। यह सेब हजार पेटी वाले बगीचों में सिर्फ 20-25 पेटी होता है। सीजन में तेजी आते ही लेबर की समस्या रहेगी। पहले लेबर हरिद्वार और शिमला में जुटा लेते थे। इसी बात को लेबर अन्य बागवान भी परेशान हैं।  
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मौसम की मार और बीमारियों से पहले ही पचास फीसदी है सेब
बागवान कहते हैं कि सेब पर पहले मौसम की मार पड़ी है। इसके बाद सेब की फसल पर स्कैब और बेमौसमी पतझड़ रोगों के कारण सेब की पचास फीसदी तक फसल तबाह चुकी है। करीब दो करोड़ पेटी सेब उत्पादन का अनुमान है।
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सेब सीजन के लिए नेपाली लेबर जुटाने में बागवानों के हाथ खड़े
हिमाचल प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि सेब सीजन के  लिए नेपाली लेबर जुटाने में बागवानों के हाथ खड़े हैं।  इसके अलावा उत्तर प्रदेश और दिल्ली से सेब के पैकर और ग्रेडर भी नहीं पहुंच रहे हैं। सत्तर हजार रुपये में बस भेजने के बाद भी बार्डर से लेबर नहीं आ रही।  

सरकार ने आश्वासन के सिवा कुछ नहीं दिया : माकपा
प्रदेश माकपा नेता संजय चौहान कहते हैं कि प्रदेश ने सिर्फ आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं किया, जिससे बागवानों को राहत मिलती। सेब पहले ही मौसम और बीमारियों के कारण पचास फीसदी रह गया है। अब समय पर तुड़ान नहीं हुआ तो बगीचों में पचास फीसदी सेब खराब हो जाएगा।

सेब सीजन के लिए लेबर लाने को देंगे बसें और वित्तीय मदद : महेंद्र

Himachal: 50 percent crop will be destroyed if apple is not harvested in time
जल शक्ति एवं बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के जल शक्ति एवं बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि सेब सीजन के लिए लेबर लाने को सरकार बसें और वित्तीय मदद देगी। हर रोज दो से तीन सौ तक लेबर राज्य के सेब उत्पादक क्षेत्रों में पहुंच रही है। इस बार सेब के दाम पिछले साल के मुकाबले बागवानों को अच्छे मिल रहे हैं। मंत्री महेंद्र सिंह ने सेब सीजन की तैयारियों को लेकर कहा कि प्रदेश सरकार बागवानों के हितों को लेकर पूरी तरह से चिंतित है।

सरकार ने कार्टन की व्यवस्था पहले ही कर दी है। सेब पर स्कैब और अन्य बीमारियों की मार पड़ने की शिकायतें आने के बाद बागवानी विभाग के अधिकारियों और नैणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की कमेटी बनाकर बगीचों में बराबर निगरानी रखने को कहा है। उनका कहना है कि टाइडमैन सेब पराला मंडी में पिछले साल 600 रुपये पेटी के हिसाब से बिकता था। इस साल वही सेब बगीचों में 2000 रुपये पेटी के हिसाब से बिका है।

कोरोना का असर : मंडियों में सेब खरीदने पहुंचे आधे से भी कम खरीददार

 इस साल सेब सीजन पर कोरोना का असर साफ देखने को मिल रहा है। बीते साल के मुकाबले मंडियों में बाहरी राज्यों से लगभग आधे ही खरीददार पहुंचे हैं। इतना ही नहीं बीते साल के मुकाबले सीजन की रफ्तार भी इस बार धीमी है।पिछले साल 15 जुलाई को औपचारिक रूप से सेब सीजन की शुरुआत होने पर रोजाना करीब 14 से 15 हजार पेटी सेब मंडी पहुंच रहा था, लेकिन इस बार 8000 पेटी सेब मंडी पहुंच पाया है।

पेड़ों से सेब के तुड़ान, पैकिंग और ढुलाई के लिए लेबर न होने के कारण भी सीजन रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा। बीते साल 15 जुलाई तक शिमला की भट्टाकुफर फल मंडी में ही करीब साठ से सत्तर खरीददार पहुंच चुके थे लेकिन इस साल अभी तक महज 25 से 30 खरीददार ही पहुंचे हैं। भट्टाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश ठाकुर का कहना है कि बीते साल के मुकाबले इस साल सीजन की रफ्तार धीमी है।

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