HP: शिमला में हवाई सेवाएं शुरू करने के लिए केंद्र को 10 दिन का अल्टीमेटम, HC ने एयरलाइंस को बनाया प्रतिवादी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है। इसके अलावा खंडपीठ ने जनहित याचिका में हवाई सेवा मुहैया कराने वाली एयरलाइंस कंपनी को भी मामले में प्रतिवादी बनाया है और नोटिस जारी किया है। जानें पूरा मामला...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश की राजधानी शिमला में हवाई सेवाएं शुरू न करने पर सख्त रुख अपनाया है। इसके लिए केंद्र सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव को हवाई सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने को लेकर फैसला लेने और इस पर विस्तृत हलफनामा दायर करने को कहा है।
खंडपीठ ने चिंता जताते हुए कहा कि जब देश की सभी राजधानियां हवाई सेवाओं से जुड़ीं है, तो शिमला क्यों नहीं। अदालत ने सिक्किम और भूटान का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर ऐसे हिमालयी क्षेत्र में जहां पर बड़े एयरक्राफ्ट नहीं चलाए जा सकते हैं तो कम से कम डबल इंजन एयरक्राफ्ट की सुविधा प्रदान की जाए, जिसमें कम से कम रोजाना 25 से 30 लोग सफर कर सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जियोग्राफिकल कंडीशन के आधार पर बरसात के मौसम में सड़कें पूरी तरह बर्बाद और क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी चिंता जाहिर की कि केंद्र सरकार की उड़ान योजना में राजधानी शिमला को वंचित रखा गया है। अदालत ने कहा कि इसे लेकर राज्यसभा में भी सवाल उठाया गया है। सुनवाई के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा वर्चुअल माध्यम से पेश हुए।
कोर्ट ने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है, जहां सड़क से दिल्ली पहुंचने में 8-10 घंटे लगते हैं। पर्यटन यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य जरिया है, ऐसे में बेहतर हवाई सुविधा देना केंद्र का सांविधानक और नैतिक कर्तव्य है। राज्य सरकार ने हलफनामे में कहा है कि अपनी सीमित वित्तीय क्षमता के बावजूद 5 अप्रैल 2026 को एलायंस एयर के साथ समझौता कर 32.64 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग प्रदान की है, ताकि उड़ानें फिर से शुरू हो सकें। राज्य सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित संशोधित उड़ान योजना में भी शिमला की अनदेखी की गई है।
प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में खराब लिफ्टों की वजह से मरीजों और बुजुर्गों को हो रही असुविधा पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने खराब लिफ्टों को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग को व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने प्रदेश के सभी बहुमंजिला सरकारी अस्पतालों की सूची और वहां मरीजों की सुविधा के लिए उपलब्ध लिफ्टों की विस्तृत जानकारी के साथ नया स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुविधा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सरकार को समयबद्ध तरीके से इन लिफ्टों को ठीक करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी। अदालत में पेश किए गए हलफनामे से यह खुलासा हुआ है कि राज्य के 118 बहुमंजिला अस्पतालों में स्थापित कुल 56 लिफ्टों में से केवल 43 ही चालू हालत में हैं।
शेष 13 लिफ्ट रखरखाव और अन्य तकनीकी कारणों से बंद पड़ी हैं। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि अस्पतालों में मरीजों और डॉक्टरों की सुविधा के लिए लगाई गई लिफ्टें बेकार पड़ी हैं। सरकार यह सुनिश्चित करे कि अगली सुनवाई तक सभी 13 खराब लिफ्टों को क्रियाशील बनाया जाए।