हिमाचल में उच्चतर शिक्षा परिषद गठित, मिलेगा ये फायदा
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प्रदेश उच्चतर शिक्षा परिषद का विधेयक अधिसूचित हो गया है। शुक्रवार को राज्य सरकार ने राजपत्र में इसकी अधिसूचना जारी की। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में परिषद के गठन का बिल पास हुआ था।
विधेयक अधिसूचित होते ही अब जल्द शिक्षाविद की परिषद के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी होगी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विद्यार्थी परिषद से जुड़े शिक्षाविद अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हैं।
उच्चतर शिक्षा में गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से सरकार ने परिषद का गठन किया है। परिषद के अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष रहेगा। अगर अध्यक्ष का आचरण और कार्य संतोषजनक नहीं रहता है तो सरकार पांच साल से पहले भी हटा सकती है।
इसलिए किया गया परिषद का गठन
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत उच्च शिक्षा में गुणात्मकता लाने के लिए परिषद का गठन किया जा रहा है। प्रदेश में रूसा के क्रियान्वयन को लेकर रणनीति और योजना तैयार करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार लाने, पाठ्यक्रम को समकालीन बनाने, मूल्यांकन और निगरानी करने, शैक्षणिक सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण तरीके से मुहैया करवाने, दिशा-निर्देश और सलाह देने, रूसा के तहत फंडिंग कार्य करने, नए संस्थानों और कॉलेजों की स्थापना पर सुझाव देने और संस्थानों की मान्यता की प्रक्रियाओं को सुधारने का काम परिषद करेगी। उच्च शिक्षा के अनुसंधान अध्ययन, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, तकनीकी विश्वविद्यालय से संबंधित कॉलेज इसके दायरे में रहेंगे। नौणी विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय और वेटरनरी कॉलेज परिषद के दायरे से बाहर रहेंगे। परिषद का मुख्यालय शिमला में होगा।