हिमाचल के 53 नए हाईवे को प्रदेश सरकार से रास्ता साफ
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प्रदेश में स्वीकृत 69 नेशनल हाईवे में से 53 का रास्ता राज्य सरकार की ओर से साफ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया कि इन राष्ट्रीय उच्च मार्गों के स्वीकृति पत्र जारी कर दिए गए हैं।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की उच्च स्तरीय टीम की बैठक हुई। इसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की फोरलेन परियोजना प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
बैठक में सीएम ने परवाणू- शिमला, सोलन-कैथलीघाट और शिमला बाईपास की प्रगति पर चिंता जताई और समय सीमा में निर्माण पूरा करने को कहा। फोरलेन निर्माण में सड़क सुरक्षा प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन करने को भी कहा।
ये परियोजना को 2021 तक हर हाल में पूरा हाेगी
पांच खंडों में चल रही किरतपुर-नेरचौक, कुल्लू-मनाली परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना को 2021 तक हर हाल में पूरा किया जाए।
राष्ट्रीय राजमार्ग 21 पर कैंची मोड़ से लरोल मार्ग के विस्तारीकरण के शेष कार्य को पूरा करने पर बल दिया। कहा कि केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने को हरसंभव मदद दे रहे हैं।
इस दौरान प्रधान सचिव मुख्यमंत्री मनीषा नंदा, एसीएस लोक निर्माण अनिल खाची, एसीएस राम सुभग सिंह, केंद्रीय राजमार्ग मंत्री के निजी सचिव वैभव डांगे, केंद्रीय मंत्रालय के अतिरिक्त महानिदेशक बीएन सिंह, मुख्य अभियंता टीटी नेगी, मंडी, कुल्लू और कांगड़ा के उपायुक्त मौजूद रहे।
डंपिंग स्थल शिक्षण संस्थानों के लिए बनेंगे मैदान
मुख्यमंत्री ने निर्माण एजेंसियों को सुझाया कि निर्माण से निकलने वाले मलबे की डंपिंग स्थलों को शिक्षण संस्थानों के साथ सामाजिक क्षेत्रों के लिए मैदानों के तौर पर विकसित करने का प्रावधान रखा जाए।
सड़कों को चौड़ा करते समय जमीन से निकाले जाने वाले मलबे का उपयोग स्थानीय प्रशासन से विचार-विमर्श कर होना चाहिए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में लगभग सभी पंचायतें सड़क से जुड़ चुकी हैं।
राज्य की कुल 3226 पंचायतों से केवल 100 पंचायतें ही शेष हैं, जिन्हें सड़क से जोड़ा जाना है। विभाग के अनुसार इन पंचायतों को सड़क सुविधा देने का कार्य प्रगति पर है।
निर्माण से पर्यटकों को न हो असुविधा
सरकार ने निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट किया कि राज्य में सैलानियों की सुरक्षा अहम है। निर्माण से पर्यटकों तथा आम यात्रियों को आवागमन में असुविधा नहीं होनी चाहिए।
ढलानों के संरक्षण, सड़क संकेतों तथा नालियों इत्यादि के लिए उपयुक्त पर्यावरण संरक्षण उपायों को क्रियान्वित किया जाना चाहिए। धूल-मिट्टी को रोकने के उपाय भी अपनाए जाना सुनिश्चित करना होगा।