हिमाचल: कर्मचारियों के एरियर भुगतान में भेदभाव पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा विभाग से मांगा जवाब
मोहित शर्मा बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में आए फैसले को राज्य के विभिन्न विभागों में समान रूप से लागू करने और कर्मचारियों के एरियर (बकाया राशि) के भुगतान में हो रहे भेदभाव पर कड़ा रुख अपनाया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मोहित शर्मा बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में आए फैसले को राज्य के विभिन्न विभागों में समान रूप से लागू करने और कर्मचारियों के एरियर (बकाया राशि) के भुगतान में हो रहे भेदभाव पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से एरियर के किस्तों में भुगतान को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि रिकॉर्ड पर यह जानकारी प्रस्तुत की जाए कि शिक्षा विभाग में ऐसे कितने मामले हैं, जिनमें कर्मचारियों को एरियर का भुगतान एकमुश्त किया जा चुका है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्तूबर को होगी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य के कई अन्य विभागों में मोहित शर्मा फैसले के तहत मिलने वाले एरियर का भुगतान कर्मचारियों को एकमुश्त कर दिया गया है, जबकि शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को यह राशि किस्तों में दी जा रही है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार इससे उनके साथ भेदभाव हो रहा है। मोहित शर्मा फैसले की महता और व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे जुड़े अन्य मामलों में भी अदालत के हस्तक्षेप के बाद विभागों को अपने फैसले बदलने पड़े हैं।
इससे पहले नितिभा सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में भी एक कॉर्पोरेशन ने वित्त विभाग की अधिसूचनाओं का हवाला देते हुए कर्मचारी को उच्च वेतनमान और मोहित शर्मा फैसले के लाभ देने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, अदालत की सख्ती के बाद कॉर्पोरेशन को अपना इन्कार संबंधी आदेश वापस लेना पड़ा। अदालत ने दो सप्ताह के भीतर मोहित शर्मा मामले के आलोक में कर्मचारी के मामले पर विचार कर उचित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 29 नवंबर, 2024 को मोहित शर्मा मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपने उच्च वेतनमान के निर्धारण और एरियर के भुगतान की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग विभागों की ओर से फैसले को लागू करने में अपनाए जा रहे भिन्न रवैये और एरियर को किस्तों में बांटकर भुगतान करने की नीति के कारण यह मामला अब कानूनी पेचीदगियों और अदालत की निगरानी के दायरे में आ गया है।