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लावारिस पशुओं को लेकर हाईकोर्ट का अहम फैसला

Fri, 10 Oct 2014 08:04 AM IST
Updated Fri, 10 Oct 2014 08:04 AM IST
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High Court seeks govt reply on stray cattle

लावारिस पशुओं को सड़क पर खुला छोड़ने पर हिमाचल हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं कि वह प्रदेश की सभी सड़कों को 31 दिसंबर 2014 तक लावारिस पशुओं से मुक्त कराए। अदालत ने कहा कि प्रदेशभर के सभी पशुओं को टैग लगाया जाए ताकि पशुओं के मालिक का पता चल सके। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति गौ हत्या नहीं करेगा और न ही गौ हत्या के लिए किसी भी तरीके से मदद करेगा।

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न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने भारतीय गौवंश संरक्षण संवर्धन परिषद हिमाचल प्रदेश की याचिका की सुनवाई के बाद आदेश दिए कि गौ हत्या के इरादे से कोई भी व्यक्ति पशुओं का व्यापार नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति पशुओं से क्रूरता करता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और पुलिस अधिनियम के प्रावधान के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।
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छह माह में बनाएं प्रदेश में गौ सदन

High Court seeks govt reply on stray cattle

अदालत ने प्रदेश में राष्ट्रीय राज्यमार्ग और राज्य मार्गों के सभी अधीक्षण अभियंताओं को आदेश दिए हैं कि कोई भी लावारिस पशु सड़कों पर न पाया जाए। अदालत ने आयुक्त नगर निगम शिमला व सभी नगर परिषदों के कार्यकारी अधिकारी व पंचायतों के प्रधानों को आदेश दिए हैं कि उनके क्षेत्राधिकार से गुजरने वाली सभी सड़कों को लावारिस पशुओं से मुक्त किया जाए।

अदालत ने प्रदेश के सभी पशु चिकित्सकों को आदेश दिए हैं कि वे लावारिस पशुओं के इलाज करने का हर संभव प्रयत्न करें। अदालत ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए कि वह दो सप्ताह के भीतर पशुओं के अधिकारों के प्रति प्रदेशवासियों को जागरूक करें।

हाईकोर्ट ने लावारिस पशुओं के लिए गौशालाएं व गौ सदन बनाने के लिए प्रदेश सरकार को 6 महीने का समय दिया है। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत व पंचायतों के अधिकारियों को गौ शालाएं बनाने के लिए जिम्मेवार ठहराया है।

गौशालाएं बनाने के लिए प्रदेश सरकार को वित्तीय सहायता देने के भी आदेश दिए। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि इन आदेशों की अनुपालना के लिए प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव जिम्मेवार होंगे।

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