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लीज सिस्टम खत्म करने की मांग वाली याचिका पर मुख्य सचिव को हाईकोर्ट का नोटिस

Thu, 30 Sep 2021 09:33 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 30 Sep 2021 09:33 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में लीज सिस्टम को खत्म करने की मांग वाली याचिका पर मुख्य सचिव और प्रधान सचिव राजस्व को नोटिस जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने कांगड़ा जिले के राकेश कुमार की ओर से मुख्य न्यायाधीश को लिखे एक पत्र पर न्यायालय की जनहित याचिका द्वारा स्वत संज्ञान लेने वाली याचिका पर यह आदेश पारित किए। 

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High Court's notice to the Chief Secretary on the petition seeking to abolish the lease system
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में लीज सिस्टम को खत्म करने की मांग वाली याचिका पर मुख्य सचिव और प्रधान सचिव राजस्व को नोटिस जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने कांगड़ा जिले के राकेश कुमार की ओर से मुख्य न्यायाधीश को लिखे एक पत्र पर न्यायालय की जनहित याचिका द्वारा स्वत संज्ञान लेने वाली याचिका पर यह आदेश पारित किए। मामले पर दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि हिमाचल सरकार 99 वर्षों की अवधि के लिए अपनी जमीन को पट्टे पर दे रही है। राज्य की ओर से अपनाई गई यह प्रथा गलत और अवैध है। इस तरह के पट्टे की मंजूरी का मतलब स्थायी रूप से अनुदान देना होगा। आरोप लगाया कि यह भी अवैध है कि लाभार्थियों के कानूनी वारिसों को मूल पट्टेदार के पट्टे के अधिकार विरासत में मिलते हैं।
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यदि ऐसी व्यवस्था जारी रहती है तो हिमाचल प्रदेश की पूरी भूमि बाहरी लोगों द्वारा ले ली जाएगी। राज्य से संबंधित संसाधनों पर कब्जा कर लिया जाएगा और उन लोगों की ओर से इसका आनंद लिया जाएगा, जो इसके हकदार नहीं हैं। प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि कई लोगों ने इस तरह के पट्टों को आय के स्रोत में बदल दिया है। पालमपुर के एक अस्पताल को प्रति वर्ष 1 रुपये का स्थायी पट्टा दिया गया है, जबकि इसके साथ भूमि की सीमा लगभग 60 कनाल है। प्रार्थी ने कोर्ट को बताया कि इस बात का पता लगाने की जरूरत है कि ऐसे पट्टों से सरकार को कितनी आय हो रही है। लाभार्थियों से कितनी आय हो रही है। लाभार्थियों की ओर से कितना कर अदा किया जा रहा है। पट्टे पर दी गई भूमि का कितना हिस्सा अस्वीकृत किया गया है। यह भी पता लगाने की जरूरत है कि क्या हिमाचल सरकार के 99 साल पूरे होने के बाद कोई उदाहरण है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से आग्रह किया है कि सरकारी भूमि के ऐसे स्थायी पट्टे देने की प्रथा और प्रणाली को तत्काल समाप्त कर दिया जाए।

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