हाईकोर्ट का आदेश: एंटी-हेलगन के उपयोग पर एक साल तक लगाई तुरंत रोक, सरकार से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने जिला शिमला के जुब्बल और कोटखाई क्षेत्र में लगी सरकारी और निजी एंटी हेलगन के उपयोग पर एक साल तक तुरंत रोक लगा दी है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला शिमला के जुब्बल और कोटखाई क्षेत्र में लगी सरकारी और निजी एंटी हेलगन के उपयोग पर एक साल तक तुरंत रोक लगा दी है। अदालत ने चिंता व्यक्त की है कि इनके उपयोग से आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश और ओलावृष्टि हो रही है, जिससे बागवानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से इस पर जवाब भी मांगा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जब तक मामले में आगे के निष्कर्ष नहीं आते, तब तक राज्य में स्थापित दो एंटी हेलगन का संचालन एक वर्ष की अवधि के लिए रोक दिया जाए।
अदालत ने राज्य सरकार से यह रिपोर्ट मांगी
अअदालत ने यह आदेश जनहित याचिका पर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार से यह रिपोर्ट मांगी है कि इन बंदूकों का उपयोग बंद करने से क्या देओरीघाट और बरेओनघाट के आसपास व निकटवर्ती क्षेत्रों के किसानों-बागवानों को कोई लाभ पहुंचा है या नहीं। याचिका में मेक्सिको, रोमानिया और अन्य देशों में एंटी हेलगन के दुष्प्रभावों का भी उल्लेख किया था। इस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने राज्य सरकार को अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों और इन देशों के अनुभवों सहित सभी पहलुओं को संबोधित करते हुए एक व्यापक जवाब दायर करने का आदेश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। इन बंदूकों की प्रभावशीलता पर डाॅ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) अध्ययन कर रहा है, जिसे अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने में कम से कम चार साल का समय लगेगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने नौणी विश्वविद्यालय को उसके कुलसचिव के माध्यम से मामले में नया प्रतिवादी बनाया है और चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है।