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हाईकोर्ट: मृत्यु के समय लागू पॉलिसी के आधार पर दी जाएगी करूणामूलक आधार पर नौकरी

Sat, 18 Dec 2021 10:29 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 18 Dec 2021 10:29 PM IST
सार

कीथ एंड किन पॉलिसी के मुताबिक करुणामूलक आधार पर नौकरी दिए जाने से जुड़े मामले में न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने उपरोक्त फैसला सुनाते हुए पथ परिवहन निगम को यह आदेश जारी किए कि प्रार्थी को 10 अप्रैल 2007 से सभी वित्तीय व अन्य लाभों सहित नियमित किया जाए। 

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High Court: Job will be given on compassionate grounds on the basis of policy applicable at the time of death
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक मामले में यह व्यवस्था दी कि करुणामूलक आधार पर नौकरी उस पॉलिसी के आधार पर दी जाएगी जो प्रार्थी के पिता की मृत्यु के दौरान लागू थी। कीथ एंड किन पॉलिसी के मुताबिक करुणामूलक आधार पर नौकरी दिए जाने से जुड़े मामले में न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने उपरोक्त फैसला सुनाते हुए पथ परिवहन निगम को यह आदेश जारी किए कि प्रार्थी को 10 अप्रैल 2007 से सभी वित्तीय व अन्य लाभों सहित नियमित किया जाए। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार एचआरटीसी में कार्यरत प्रार्थी के पिता की मृत्यु 25 अक्टूबर 2000 को हो गई थी। लेकिन प्रार्थी के नाबालिग होने के कारण वह तुरंत नौकरी के लिए आवेदन न कर सका।

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हालांकि प्रार्थी के बालिग होने के तुरंत बाद  उसने निगम को उसे नौकरी देने के लिए आवेदन दिया। लेकिन पथ परिवहन निगम ने प्रार्थी को नियमित सेवा के आधार पर नौकरी देने के बजाय अनुबंध आधार पर नौकरी पर रख लिया। उपरोक्त याचिका से पहले प्रार्थी ने हाईकोर्ट के समक्ष सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित फैसले के मुताबिक उसे अनुबंध के आधार पर दी गई सेवा की तारीख से नियमित किए जाने के लिए केस दायर किया था। हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के आधार पर प्रार्थी के मामले पर विचार करने के आदेश जारी किए थे।
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लेकिन निगम ने प्रार्थी के मामले को इस आधार पर रद्द कर दिया था कि प्रार्थी का मामला 5 फरवरी 2007 को उसे नौकरी देने के लिए प्राप्त हुआ था और भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में किये गए संशोधन के अनुसार उसे केवल अनुबंध आधार पर ही रखा जा सकता था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 25 अक्टूबर 2000 को जब प्रार्थी के पिता की मौत हुई थी उस समय अनुबंध के आधार पर नौकरी दिए जाने का प्रावधान नहीं था। इसके अलावा निगम द्वारा तय तारीख से पूर्व ही वह बालिग हो चुका था।

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