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हाईकोर्ट का वक्त बर्बाद करने पर लगाई 50 हजार की कास्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 15 Jun 2016 10:38 AM IST
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हिमाचल हाईकोर्ट
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प्रदेश उच्च न्यायालय ने गुणवत्ताहीन याचिका को 50 हजार रुपये कास्ट के साथ खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह की खंडपीठ ने दीन चंद द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्रार्थी ने रेवन्यू कोर्ट्स और हाईकोर्ट का बेवजह समय बर्बाद किया है।
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रेवेन्यू कलेक्टर ने साल 1998 में प्रार्थी दीन राम के खिलाफ वन भूमि पर किए अवैध कब्जे को लेकर कार्रवाई शुरू की थी। यह याचिका भी आज से करीब सात साल पहले दायर की गई थी। इसके बावजूद प्रार्थी ने खुद अवैध कब्जा छोड़ने के लिए कलेक्टर के समक्ष इच्छा जाहिर की थी।
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फिर भी प्रार्थी ने अवैध कब्जा पाए जाने की स्थिति में कब्जा छोड़ने के बजाए रेवन्यू कोर्ट्स और हाईकोर्ट के समक्ष मामला दायर किया। न्यायालय ने पाया कि एक तरफ तो प्रार्थी की यह दलील थी कि उसने सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जा नहीं किया है। दूसरी
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तरफ विवादित भूमि पर एडवरस पोजेशन के दम पर मालिकाना हक जता रहा है। जो कि प्रार्थी के वन भूमि पर किए अवैध कब्जे को साबित करने के लिए पर्याप्त है कि जिस भूमि पर उसने कब्जा किया है, वह जानता था कि उसने कब्जा अवैध रूप से कर रखा है और वह इस भूूमि का वैध मालिक नहीं था।