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स्क्रब टायफस की दस्तक, आईजीएमसी में डेढ़ दर्जन मामले
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शिमला। बरसात शुरू होते ही राजधानी में स्क्रब टायफस के मामले सामने आना शुरू हो गए हैं। आईजीएमसी में स्क्रब टायफस से पीड़ित लोग आ रहे हैं। अब तक करीब डेढ़ दर्जन मामले सामने आ चुके हैं। दो मरीजों को दाखिल किया गया है। कई मरीजों को दवाइयां देकर घर भेज दिया गया है।
आईजीएमसी की ओपीडी में बुखार की शिकायत को लेकर रोजाना मामले सामने आ रहे हैं। बरसात में स्क्रब टायफस के मामले अधिक आते हैं। अस्पताल में अब तक शहर के अलावा शोघी, घणाहट्टी, सुन्नी और ठियोग से कई मरीज इलाज के लिए आईजीएमसी पहुंच रहे हैं। आईजीएमसी के मेडिसन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उष्येंद्र शर्मा ने बताया कि शुरूआती दो दिन में बुखार आना शुरू हो जाता है। एक हफ्ते बाद बुखार के तेज लक्षण दिखते हैं। समय पर अस्पताल में उपचार के लिए मरीज नहीं पहुंचता को यह घातक हो सकता है। बुखार अधिक होने से व्यक्ति के गुर्दे, लीवर और फेफड़ों को अधिक नुकसान हो सकता है। शुरुआती चरण में चिकित्सक डॉक्सीसाइकिलन दवा देते हैं।
ये हैं लक्षण
तेज बुखार 100 से 102 डिग्री तक जा सकता है
जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना
शरीर में अकड़न या शरीर टूटा हुआ लगना
अधिक संक्रमण में गर्दन, बाजू के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां होना
शरीर की सफाई का ध्यान रखें
घर के चारों ओर घास, खरपतवार नहीं उगने दें
घर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें
घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें
---
ऐसे होता है स्क्रब टायफस
यह रोग एक जीवाणु रिकेटशिया से संक्रमित पिस्सू (माइट) के काटने से फैलता है। यह खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों में पनपता है। यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टयफस बुखार पैदा करता है।
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आईजीएमसी की ओपीडी में बुखार की शिकायत को लेकर रोजाना मामले सामने आ रहे हैं। बरसात में स्क्रब टायफस के मामले अधिक आते हैं। अस्पताल में अब तक शहर के अलावा शोघी, घणाहट्टी, सुन्नी और ठियोग से कई मरीज इलाज के लिए आईजीएमसी पहुंच रहे हैं। आईजीएमसी के मेडिसन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उष्येंद्र शर्मा ने बताया कि शुरूआती दो दिन में बुखार आना शुरू हो जाता है। एक हफ्ते बाद बुखार के तेज लक्षण दिखते हैं। समय पर अस्पताल में उपचार के लिए मरीज नहीं पहुंचता को यह घातक हो सकता है। बुखार अधिक होने से व्यक्ति के गुर्दे, लीवर और फेफड़ों को अधिक नुकसान हो सकता है। शुरुआती चरण में चिकित्सक डॉक्सीसाइकिलन दवा देते हैं।
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ये हैं लक्षण
तेज बुखार 100 से 102 डिग्री तक जा सकता है
जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना
शरीर में अकड़न या शरीर टूटा हुआ लगना
अधिक संक्रमण में गर्दन, बाजू के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां होना
शरीर की सफाई का ध्यान रखें
घर के चारों ओर घास, खरपतवार नहीं उगने दें
घर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें
घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें
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ऐसे होता है स्क्रब टायफस
यह रोग एक जीवाणु रिकेटशिया से संक्रमित पिस्सू (माइट) के काटने से फैलता है। यह खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों में पनपता है। यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टयफस बुखार पैदा करता है।
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