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स्क्रब के आठ मामले पॉजिटिव
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शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में स्क्रब टायफस के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। अस्पताल प्रशासन ने स्क्रब के 28 सैंपल जांच के लिए भेजे थे जिसमें से आठ मरीजों की रिपोर्ट पाजिटिव पाई गई है। इनमें ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं शामिल हैं। शुक्रवार को एकसाथ आठ नए मामले आने से हड़कंप मचा रहा। हर रोज पांच से सात मरीजों को स्क्रब टायफस की पुष्टी हो रही है।
अस्पताल में आने वाले मरीजों को बुखार और स्क्रब टायफस की आशंका होने को लेकर अब तक करीब एक हजार से अधिक मरीजों के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे जा चुके हैं। इनमें से 63 से अधिक मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। छह मरीजों की मौत हो चुकी है। लगातार बीमारियाें की जद्द में महिलाओं के आने के बाद से हड़कंप मचा हुआ। डॉक्टरों का कहना है कि अगर मरीजों की तेज बुखार होता या फिर अन्य समस्या पेश आती है तो वह तुरंत अस्पताल में आकर उपचार करवाएं। स्क्रब टायफस बरसात के मौसम में घास में पनपने वाले पिस्सू के काटने से होता है। इस रोग की जकड़ में आने के बाद मरीज को सिरदर्द होता है। बुखार के साथ जोड़ों में दर्द रहता है। मरीज को थकावट महसूस होती है और शरीर पर लाल दाने आ जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के लक्षण नजर आने पर बीमार व्यक्ति को तुरंत अस्पताल आकर उपचार करवाना चाहिए ताकि समय रहते उसका इलाज किया जा सके।
अधिकतर महिलाएं हो रहीं बीमार
आईजीएमसी के डिप्टी एमएस डाक्टर राहुल राय ने बताया कि बरसात के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं पशुओं के लिए चारा लाने अधिकांश समय खेतों में काम करती हैं। इसी दौरान घास में पाया जाने वाला यह यह पिस्सू काट लेता है तथा वह स्क्रब टायफस की चपेट में आ जाती हैं।
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घरों के पास न उगने दें खरपतवार
स्वास्थ्य महकमे ने लोगों को हिदायत दी है कि बरसात के सीजन में घरों के आसपास झाड़ियां और घास
न उगने दें। घास में स्क्रब टायफस का पिस्सू पनप सकता है। घास काटने वक्त पूरे बाजू वाले कपड़े पहनें। खेतों में काम करते वक्त पैरों को ढांपकर रखें। दो दिन से अधिक बुखार होने पर अस्पताल आएं। इसके अतिरिक्त अस्पताल में चिकित्सक मरीजों को बीमारी की चपेट में आने के बाद डॉक्सीसाइिक्लन और एजीथ्रोमाइसिन दवाएं देते हैं।
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अस्पताल में आने वाले मरीजों को बुखार और स्क्रब टायफस की आशंका होने को लेकर अब तक करीब एक हजार से अधिक मरीजों के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे जा चुके हैं। इनमें से 63 से अधिक मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। छह मरीजों की मौत हो चुकी है। लगातार बीमारियाें की जद्द में महिलाओं के आने के बाद से हड़कंप मचा हुआ। डॉक्टरों का कहना है कि अगर मरीजों की तेज बुखार होता या फिर अन्य समस्या पेश आती है तो वह तुरंत अस्पताल में आकर उपचार करवाएं। स्क्रब टायफस बरसात के मौसम में घास में पनपने वाले पिस्सू के काटने से होता है। इस रोग की जकड़ में आने के बाद मरीज को सिरदर्द होता है। बुखार के साथ जोड़ों में दर्द रहता है। मरीज को थकावट महसूस होती है और शरीर पर लाल दाने आ जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के लक्षण नजर आने पर बीमार व्यक्ति को तुरंत अस्पताल आकर उपचार करवाना चाहिए ताकि समय रहते उसका इलाज किया जा सके।
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अधिकतर महिलाएं हो रहीं बीमार
आईजीएमसी के डिप्टी एमएस डाक्टर राहुल राय ने बताया कि बरसात के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं पशुओं के लिए चारा लाने अधिकांश समय खेतों में काम करती हैं। इसी दौरान घास में पाया जाने वाला यह यह पिस्सू काट लेता है तथा वह स्क्रब टायफस की चपेट में आ जाती हैं।
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घरों के पास न उगने दें खरपतवार
स्वास्थ्य महकमे ने लोगों को हिदायत दी है कि बरसात के सीजन में घरों के आसपास झाड़ियां और घास
न उगने दें। घास में स्क्रब टायफस का पिस्सू पनप सकता है। घास काटने वक्त पूरे बाजू वाले कपड़े पहनें। खेतों में काम करते वक्त पैरों को ढांपकर रखें। दो दिन से अधिक बुखार होने पर अस्पताल आएं। इसके अतिरिक्त अस्पताल में चिकित्सक मरीजों को बीमारी की चपेट में आने के बाद डॉक्सीसाइिक्लन और एजीथ्रोमाइसिन दवाएं देते हैं।