हिमाचल के वनों से जड़ी बूटी ले जाने पर वसूली जाएगी रकम : विपिन परमार
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प्रदेश के वनों में उगने वाली जड़ी बूटी का दोहन करने वाले औद्योगिक घरानों से अब रकम वसूली जाएगी। विश्व जैव विविधता दिवस पर प्रदेश जैव विविधता बोर्ड की ओर से आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद मंत्री विपिन सिंह परमार ने यह बात कही।
कहा कि सूबे की जैव विविधता का वैज्ञानिक आधार पर दोहन होने से न सिर्फ यहां की संपदा बची रहेगी, बल्कि उससे प्रदेश व स्थानीय लोगों की आर्थिकी में भी सुधार आएगा।
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री विपिन सिंह परमार मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जैव विविधता का संरक्षण बेहद जरूरी है। जागरूकता से ही जैविक धरोहर को बचाया और बढ़ाया जा सकता है।
ये बड़ी कंपनियां संपर्क में है
कहा कि रामदेव की कंपनी को आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां और अपना संस्थान स्थापित करने के लिए आयुर्वेद विभाग संपर्क में है। उन्होंने डाबर जैसे संस्थान का नाम लेते हुए कहा कि प्रदेश से जो भी कंपनी जड़ी बूटी ले जाएगी उससे निर्धारित रकम वसूली जाएगी।
इसके लिए नीति तैयार की जा रही है। नौणी विवि के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. एनएस चौहान ने बायोलॉजिकल रिसोर्स की महत्ता के बारे में बताया। जैव विविधता सप्ताह के दौरान हुए क्विज, पेंटिंग जैसे आयोजनों के विजयी बच्चों को सम्मानित किया।
फागली स्कूल के बच्चों ने जैव विविधता पर एक लघु नाटिका पेश की। कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर, बोर्ड के सदस्य सचिव कुनाल सत्यार्थी, स्टेट प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर डॉ. एमएल चौहान समेत कई स्कूलों के बच्चे उपस्थित रहे।