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Shimla News: विवि में आधी कक्षाएं स्मार्ट, 1.99 करोड़ के उपकरण पड़े हैं बेकार

Thu, 16 Apr 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 11:59 PM IST
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Half the classrooms in the university are smart, equipment worth Rs 1.99 crore is lying idle.
सीएजी रिपोर्ट में आईसीटी, लैब और ईआरपी सिस्टम की खामियां उजागर
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रसायन, सूक्ष्म जीव विज्ञान में उपकरणों की भारी कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के बुनियादी ढांचे की स्थिति पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय में आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का विकास अपेक्षित स्तर तक नहीं हो पाया है जिससे न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि शोध और प्रशासनिक व्यवस्था भी कमजोर पड़ रही है।
यही नहीं 1.99 करोड़ रुपये की लागत से खरीदे वैज्ञानिक उपकरण वर्षों से खराब पड़े हैं और उनका उपयोग नहीं हो रहा है। विश्वविद्यालय के 20 विभागों में से केवल 6 ही पूरी तरह से सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) से लैस हैं। कुल कक्षाओं में महज 51 प्रतिशत ही आईसीटी-सक्षम हैं जो डिजिटल शिक्षण के वर्तमान मानकों से काफी पीछे हैं। स्मार्ट क्लास रूम व्यवस्था को लेकर भी छात्रों में असंतोष है, जहां लगभग 50 प्रतिशत छात्रों ने उपलब्ध सुविधाओं को अपर्याप्त बताया। प्रयोगशालाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है। रसायन विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान और जैव विज्ञान विभागों में 36 से 79 प्रतिशत तक उपकरणों की कमी दर्ज की गई। इनमें उच्च स्तरीय प्रयोगशाला उपकरण शामिल हैं जो रखरखाव के अभाव में निष्क्रिय हो चुके हैं। इससे न केवल संसाधनों की बर्बादी हो रही है बल्कि छात्रों और शोधार्थियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सिस्टम की स्थिति को भी गंभीर बताया है। कुल 37 मॉड्यूल में से 30 मॉड्यूल सितंबर 2023 तक गैर-कार्यात्मक पाए गए। इन मॉड्यूल का उपयोग न होने और उनमें आवश्यक संशोधन न किए जाने के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। परीक्षा, शोध प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी इससे बाधित हो रहे हैं।
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कक्षाओं को सक्षम बनाने के निर्देश
सीएजी ने स्पष्ट किया है कि बुनियादी ढांचे की इन खामियों का सीधा असर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि आईसीटी सुविधाओं का विस्तार करते हुए सभी कक्षाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाए। साथ ही प्रयोगशालाओं में उपकरणों की कमी को दूर करने और खराब पड़े उपकरणों को तत्काल ठीक करने की आवश्यकता बताई गई है। वहीं कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि यह रिपोर्ट उनके कार्यकाल से पहले की है। अब व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है।





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