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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   World Anaesthesia Day: Beyond just inducing unconsciousness, anaesthetists now also monitor the patient's hear

विश्व एनेस्थीसिया दिवस: अब सिर्फ बेहोशी नहीं, मरीज की धड़कन पर भी नजर रखते हैं एनेस्थेटिस्ट

Fri, 16 Oct 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh आदित्य सोफत, शिमला।
आदित्य सोफत, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 16 Oct 2026 05:30 AM IST
सार

अब सर्जरी की जरूरत के अनुसार मरीज को पूरी तरह बेहोश करने के बजाय शरीर के किसी विशेष हिस्से को सुन्न करके भी ऑपरेशन किया जा सकता है।

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World Anaesthesia Day: Beyond just inducing unconsciousness, anaesthetists now also monitor the patient's hear
डाॅक्टर(प्रतीकात्मक)। - फोटो : Freepik

विस्तार

एनेस्थीसिया के 180 साल बाद अब आधुनिक तकनीकों, जीवनरक्षक दवाओं और निगरानी उपकरणों ने एनेस्थीसिया की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुरक्षित हो गई है। पहले मरीज को बेहोश करने के लिए दवाओं को सूंघाकर दिया जाता था और सर्जरी के लिए शरीर को पूरी तरह बेहोश किया जाता था। अब सर्जरी की जरूरत के अनुसार मरीज को पूरी तरह बेहोश करने के बजाय शरीर के किसी विशेष हिस्से को सुन्न करके भी ऑपरेशन किया जा सकता है। आधुनिक मशीनों और मॉनिटरिंग तकनीकों की मदद से ऑपरेशन के दौरान मरीज के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जाती है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ यानी एनेस्थेटिस्ट की भूमिका केवल मरीज को बेहोश करने तक सीमित नहीं है।

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वे ऑपरेशन से पहले मरीज की स्थिति का आकलन करने, सर्जरी के दौरान बीपी, ऑक्सीजन स्तर और पल्स की निगरानी करने तथा ऑपरेशन के बाद रिकवरी में भी अहम जिम्मेदारी निभाते हैं। क्रिटिकल केयर यूनिट और बेसिक लाइफ सपोर्ट में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। मॉनिटरिंग उपकरणों से मरीज की स्थिति में होने वाले बदलावों का समय रहते पता लगाने में मदद मिलती है। इससे ऑपरेशन के दौरान जटिलताओं को संभालना आसान होता है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ लंबे और जटिल ऑपरेशन से लेकर रोबोटिक सर्जरी तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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बच्चों को एनेस्थीसिया देना चुनौती
एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की जरूरत केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं है। एमआरआई जैसी जांच के दौरान घबराहट या स्थिर न रह पाने के कारण कुछ मरीजों को बेहोश करने की जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में मरीज की स्थिति के अनुसार एनेस्थीसिया दिया जाता है। इसके अलावा मनोरोगियों को इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ईसीटी) देने और छोटे बच्चों को एनेस्थीसिया देने में भी विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। बच्चों की उम्र, वजन और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दवा की मात्रा और निगरानी तय की जाती है।

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सर्जरी के बाद रिकवरी तक जिम्मेदारी
ऑपरेशन पूरा होने के बाद मरीज को सुरक्षित तरीके से होश में लाना और उसकी रिकवरी पर नजर रखना भी एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की जिम्मेदारी है। इस दौरान दर्द नियंत्रित करने और मरीज की स्थिति की निगरानी पर ध्यान दिया जाता है। पांच मिनट से लेकर 15 घंटे तक चलने वाली सर्जरी में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों को मरीज की स्थिति के अनुरूप लगातार निगरानी और प्रबंधन करना पड़ता है।

एनेस्थीसिया के क्षेत्र में पिछले वर्षों में कई बदलाव आए हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा बेहतर हुई है। एनेस्थीसिया चिकित्सक ऑपरेशन से पहले, सर्जरी के दौरान और उसके बाद भी मरीज की देखभाल करते हैं। वे क्रिटिकल केयर यूनिट और बेसिक लाइफ सपोर्ट में भी टीम के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। -डॉ. अजय सूद, विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसिया, आईजीएमसी शिमला

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