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गुरु पूर्णिमा कल, दोपहर 3:46 बजे तक है तिथि
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सर्वार्थ सिद्धि योग देर रात 12:14 बजे तक
पूर्णिमा तिथि शनिवार शाम 5:59 बजे होगी शुरू : नौटियाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रविवार को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी। भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया है। गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति असंभव है।
गुरुपूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। शुभ योगों में सर्वार्थ सिद्धि योग की गणना की जाती है। शुभ कार्यों को करने के लिए यह उत्तम योग है। राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित उमेश चंद्र नौटियाल ने बताया कि आषाढ़ महीने की शुक्ल पूर्णिमा तिथि शनिवार शाम 5:59 बजे शुरू हो जाएगी। रविवार दोपहर 3:46 बजे तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। कहा कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है, उस दिन वह तिथि मान्य होती है। आषाढ़ पूर्णिमा तिथि में सूर्योदय रविवार सुबह 5:37 बजे होगा। ऐसे में गुरु पूर्णिमा रविवार को मनाई जाएगी। सर्वार्थ सिद्धि योग रविवार सुबह 5:37 बजे से शुरू होगा जो देर रात 12:14 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही गुरु पूर्णिमा पर प्रीति योग रात में 9:11 बजे लगेगा। उत्तराषाढा नक्षत्र सुबह से लेकर देर रात 12:14 बजे तक है। चंद्रमा धनु राशि में सुबह 7:27 बजे तक रहेगा।
पूजा, उपवास और दान करना पुण्यदायी
गुरु पूर्णिमा पर की गई पूजा, उपवास और दान-पुण्य करना पुण्यदायी माना गया है। इस दिन गुरुओं का आशीर्वाद लेना चाहिए और चरण वंदना कर दक्षिणा देनी चाहिए। यह दिन केवल शैक्षिक गुरुओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन करने वाले सभी गुरुओं के लिए समर्पित है। इस दिन गुरु मंत्र लेने की भी परंपरा है। इस मंत्र का नियमित जाप करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक प्रगति होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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गुरु महर्षि वेदव्यास का हुआ था जन्म
गुरु पूर्णिमा को वेदव्यास जयंती के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। महर्षि वेदव्यास को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने मनुष्य को चारों वेदों का ज्ञान दिया था।
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पूर्णिमा तिथि शनिवार शाम 5:59 बजे होगी शुरू : नौटियाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रविवार को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी। भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया है। गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति असंभव है।
गुरुपूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। शुभ योगों में सर्वार्थ सिद्धि योग की गणना की जाती है। शुभ कार्यों को करने के लिए यह उत्तम योग है। राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित उमेश चंद्र नौटियाल ने बताया कि आषाढ़ महीने की शुक्ल पूर्णिमा तिथि शनिवार शाम 5:59 बजे शुरू हो जाएगी। रविवार दोपहर 3:46 बजे तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। कहा कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है, उस दिन वह तिथि मान्य होती है। आषाढ़ पूर्णिमा तिथि में सूर्योदय रविवार सुबह 5:37 बजे होगा। ऐसे में गुरु पूर्णिमा रविवार को मनाई जाएगी। सर्वार्थ सिद्धि योग रविवार सुबह 5:37 बजे से शुरू होगा जो देर रात 12:14 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही गुरु पूर्णिमा पर प्रीति योग रात में 9:11 बजे लगेगा। उत्तराषाढा नक्षत्र सुबह से लेकर देर रात 12:14 बजे तक है। चंद्रमा धनु राशि में सुबह 7:27 बजे तक रहेगा।
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पूजा, उपवास और दान करना पुण्यदायी
गुरु पूर्णिमा पर की गई पूजा, उपवास और दान-पुण्य करना पुण्यदायी माना गया है। इस दिन गुरुओं का आशीर्वाद लेना चाहिए और चरण वंदना कर दक्षिणा देनी चाहिए। यह दिन केवल शैक्षिक गुरुओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन करने वाले सभी गुरुओं के लिए समर्पित है। इस दिन गुरु मंत्र लेने की भी परंपरा है। इस मंत्र का नियमित जाप करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक प्रगति होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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गुरु महर्षि वेदव्यास का हुआ था जन्म
गुरु पूर्णिमा को वेदव्यास जयंती के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। महर्षि वेदव्यास को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने मनुष्य को चारों वेदों का ज्ञान दिया था।