गुड़िया न्याय मंच ने घेरा पुलिस मुख्यालय, DGP की बर्खास्तगी पर अड़ा
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गुड़िया न्याय मंच ने गुड़िया को न्याय देने और डीजीपी सोमेश गोयल को पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर पुलिस मुख्यालय का घेराव किया।
बुधवार शाम चार से छह बजे तक प्रदर्शनकारियों ने मुख्यालय के बाहर डीजीपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आईजी जहूर जैदी समेत आठ पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी को प्रदर्शनकारियों ने जनता की पहली जीत बताया।
न्याय मंच के पदाधिकारियों ने सीबीआई से की गुड़िया के असली हत्यारों को जल्द पकड़ने की मांग भी की। पुलिस मुख्यालय के बाहर करीब दो घंटे तक गुड़िया न्याय मंच के बैनर तले प्रदर्शन किया गया।
मंच के सह संयोजक विजेंद्र मेहरा ने सीबीआई द्वारा पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी का स्वागत किया है। उन्होंने सीबीआई से मांग
की है कि जांच तेज की जाए और गुड़िया के असली कातिलों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने डीजीपी को तुरंत पद से बर्खास्त करने के मांग की। कहा कि पुलिस कस्टडी में सूरज की हत्या हुई।
प्रदर्शनकारियों से ज्यादा थी पुलिस
प्रदेश में कानून व्यवस्था चौपट हो गई है। पुलिस से लोगों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने कहा है कि गुड़िया को न्याय दिलाने की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक कि असली गुनहगार पकड़े नहीं जाते हैं।
उन्होंने प्रदेश सरकार से पूछा कि आखिर उसकी क्या मजबूरी है कि वह डीजीपी को बचाया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा है कि अगर डीजीपी को तुरंत बर्खास्त न किया गया तो आंदोलन तेज होगा व निर्णायक मोड़ लेगा।
प्रदर्शनकारियों को पूर्व विधायक राकेश सिंघा, माकपा के राज्य सचिव डॉ. ओंकार शाद, डॉ. कुलदीप तनवर, प्रेम गौतम, जगत राम, बलबीर पराशर ने भी संबोधित किया।
प्रदर्शन में विवेक राणा, नोबल, किशोरी ढटवालिया, विनोद बिरशांटा, अनिल, सोनिया, आशु भारती, बबलू, अशोक, रीता, हेमलता सहित कई अन्य मौजूद रहे।
मुख्यालय के बाहर तनाव की स्थिति से निपटने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों से ज्यादा पुलिस कर्मी मौके पर तैनात रहे।
मुख्यालय के गेट को बंद कर पुलिस ने बेरिकेड्स लगाए, ताकि प्रदर्शनकारी अंदर प्रवेश न कर सकें। डीसी, एसपी, एसडीएम, डीएसपी सहित कई अन्य बड़े अफसर भी मौके पर मौजूद रहे।
राजनीतिक लाभ के लिए मामला न लटकाए सीबीआई: सिंघा
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने सीबीआई को आगाह किया है कि वह केंद्र सरकार के दबाव में आकर उसके राजनीतिक लाभ के लिए गुड़िया मामले की जांच में देरी न करे।
माकपा नेता और पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने बुधवार को राजधानी शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता गुड़िया मामले में राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।
लॉकअप में सूरज की हत्या के लिए पुलिस महानिदेशक को मुख्य अपराधी माना जाना चाहिए। डीजीपी को तुरंत पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
माकपा ने पुलिस की एसआईटी पर गुड़िया मामले की जांच को भटकाने के लिए कई आवश्यक तथ्यों को सुनियोजित तरीके से नष्ट करने और हिमाचल सरकार पर तथ्यों को नष्ट करनेे वाले पुलिस अफसरों और कर्मचारियों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।
राकेश सिंघा ने कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री के आधिकारिक फेसबुक पेज पर पहले कुछ संदिग्धों के फोटो अपलोड किए गए तथा बाद में फोटो हटा दिए गए, इस मामलेे की गहनता से जांच होनी चाहिए।
माकपा सीबीआई जांच की सुस्त रफ्तार से संतुष्ट नहीं है। गुड़िया मामले में कुछ ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जो लोकतंत्र और जनता के लिए खतरे की घंटी है।
10 जुलाई को एसआईटी का गठन हुआ है, तब से लेकर उस टीम ने गुड़िया प्रकरण से संबंधित तथ्यों को सिलसिलेवार नष्ट करने के प्रयास किए।
जिस पुलिस थाने के अंदर सूरज की हत्या हुई थी, उसी थाने की पुलिस कार्यप्रणाली की मुख्यमंत्री द्वारा सराहना करना दर्शाता है कि सीएम राजू द्वारा सूरज की हत्या करने की पुलिस की थ्योरी का समर्थन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हो सकता है कि मुख्यमंत्री अपनी फेसबुक पर अपलोड की गई संभावित अपराधियों की तस्वीरों को हटाए जाने के कारण ऐसा कर रहे हों।
पार्टी ने सूरज हत्याकांड के चश्मदीद गवाह संतरी दिनेश को सुरक्षा प्रदान करने और सूरज की पत्नी ममता द्वारा दिए गए बयान को धारा 164 के तहत दर्ज किए जाने की मांग की।
माकपा के राज्य सचिव ओंकार शाद, राज्य सचिवालय सदस्य संजय चौहान, डॉ. कुलदीप सिंह तंवर और प्रेम गौतम भी इस अवसर पर मौजूद रहे।