स्कूली बच्चों के भोजन पर नजर रखेंगी ग्राम सभाएं, केंद्र ने दिए ये आदेश
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सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को रोजाना स्कूल में दिए जाने वाले भोजन का अब ग्राम सभाओं के माध्यम से सोशल आडिट करवाया जाएगा। केंद्र सरकार ने देश के सभी राज्यों को मिड डे मील का सोशल आडिट करवाने के आदेश दिए हैं।
सोशल आडिट के तहत स्कूलों में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता और मिड डे मील फंड को खर्च करने के तरीकों पर नजर रखी जाएगी। केंद्र सरकार के आदेशानुसार प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलों के उपनिदेशकों, ब्लॉक अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।
ग्रामीण विकास विभाग को भी इस कार्य में मदद करने के लिए पत्र लिखा गया है। प्रदेश के 15465 स्कूलों में रोजाना पहली से आठवीं तक के बच्चों को दोपहर का भोजन निशुल्क दिया जाता है।
एसएमसी की बढ़ाई जाएंगी शक्तियां
प्रदेश में 23441 मिड डे मील वर्करों द्वारा 5,49,818 बच्चों के लिए रोजाना भोजना बनाया जाता है। स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन के लिए निदेशालय द्वारा सप्ताह के सभी दिनों के लिए अलग से मेन्यू तैयार किया गया है।
अब सोशल आडिट के माध्यम से केंद्र सरकार मिड डे मील पर किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से भी नजर रखना चाहती है। इसके चलते ग्राम सभाआें को सोशल आडिट के लिए चुना गया है। मिड डे मील पर नजर रखने के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की मदद भी ली जाएगी।
जल्द ही निदेशालय द्वारा सभी स्कूलों में बनाई गई एसएमसी के प्रधानों को एक रिकार्डिड वॉयस कॉल की जाएगी। इस कॉल के माध्यम से एसएमसी प्रधानों को स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए जागरूक किया जाएगा।