सीएम वीरभद्र के बाद राजभवन से भी आया बड़ा बयान
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों की मंगलवार को बुलाई गई बैठक को लेकर प्रदेश में मचे सियासी घमासान पर राजभवन शिमला ने वीरवार को स्थिति स्पष्ट की है। कांग्रेस और माकपा द्वारा राज्यपाल की बैठक को समांतर सरकार चलाने जैसा बताने और असंवैधानिक बताने की वितरित टिप्पणियों पर राजभवन ने बताया है कि सरकार से परामर्श के बाद ही बैठक बुलाई गई।
बैठक के लिए सरकार से किए गए पत्राचार का तिथि वार भी राजभवन ने ब्यौरा दिया है। राजभवन ने स्पष्ट किया है कि इस बैठक के प्रत्येक पक्ष की जानकारी सरकार को थी तथा सरकार की इसमें सहमति भी थी। यह कहना गलत है कि यह समानांतर सरकार चलाने जैसा है।
राजभवन ने स्पष्ट किया है कि इस बैठक में परिचर्चा के लिए चुने गए चारों बिंदु प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति के हित में हैं। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह सभी का दायित्व है कि वह इस अभियान की गंभीरता को समझें। इसमें कुछ भी असंवैधानिक व राजनैतिक नहीं है।
राजभवन ने तिथिवार बताया पत्राचार
इस बैठक के बिंदुओं को लेकर राज्यपाल ने सितंबर महीने के प्रारंभ में मुख्यमंत्री से राजभवन में लंबी मंत्रणा की थी तथा उनकी सहमति से यह बैठक आयोजित की गई। यह बैठक पहले 30 सितंबर को निर्धारित की गई थी जिसमें संबंधित मंत्रियों, अधिकारियों एवं स्वयंसेवी संगठनों को लिखित रूप में आमंत्रित किया गया था।
26 सितंबर को प्रदेश सरकार के लिखित आग्रह पर इस बैठक को अक्तूबर महीने के लिए स्थगित कर दिया गया था तथा इस बैठक के लिए मुख्यमंत्री से 28 से 31 अक्तूबर के बीच में कोई भी समय देने के लिए तथा बैठक में उपस्थित रहने के लिए आग्रह किया गया। इस संबंध में राज्यपाल के सचिव ने राजभवन में प्रस्तावित बैठक के बारे में मुख्यमंत्री से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री को इस बैठक में आमंत्रित किया गया लेकिन उनके परामर्श पर इस बैठक में उन्हें तथा मंत्रियों को आमंत्रित न कर केवल अधिकारियों एवं स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों को ही आमंत्रित किया गया। इन तथ्यों के संदर्भ में किया गया पत्राचार राजभवन में उपलब्ध है।
संवैधानिक पद की गरिमा का सम्मान करे कांग्रेसः भाजपा
उधर, भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी को संवैधानिक पद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता गणेश दत्त ने कहा कि राज्यपाल देवव्रत आचार्य ने प्रदेश के 4 मौलिक विषयों पर एक अभियान चलाने को जनता से सहयोग की अपील की है तथा उन विषयों पर सहयोग मांगा है, लेकिन कांग्रेस सरकार इन्हें गंभीरता से लागू करवाने की बजाय राज्यपाल पर समानांतर सरकार चलाने का आरोप लगा रही है।
यह सर्वोच्च संवैधानिक संस्था के अधिकारों को चुनौती देने वाला है। कहा कि प्रदेश में नशे का कारोबार चरम पर है। कुछ तत्वों को सरकार का संरक्षण है। राज्यपाल प्रदेश से नशे के कारोबार तथा नशाखोरी को खत्म करना चाहते हैं तो इस पर कांग्रेस को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उच्च न्यायालय ने अनाथ छोड़ी गई गायों के रक्षण तथा उनकी देखभाल के लिए सभी जिलाधीशों को गौसदन बनाकर गोधन की देखभाल करने को कहा था।
लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को अनदेखा कर दिया है। राज्यपाल ने प्रदेश में जैविक खेती पर जोर दिया है साथ ही उन्होंने प्रदेश की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए राज्य को पर्यटन क्षेत्र में प्राथमिक सूची में रखने का सुझाव दिया है। पार्टी ने कांग्रेस पार्टी की सरकार से पूछा है कि राज्यपाल के 4 सूत्रीय विकास योजनाओं पर उन्हें आपत्ति क्यों है?