मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक बिल मंजूर, ये विधायक हैं दौड़ में
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प्रदेश में पहली बार मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अप्रैल में विधानसभा से पारित मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक बिल को मंजूरी दे दी है। विधानसभा से बिल पारित होने के बाद विपक्ष ने दोनों पदों को लाभ के पद की श्रेणी में बताते हुए आपत्ति जताई थी।
दूसरी तरफ यह माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से असंतुष्ट विधायकों को साधने के लिए सरकार पर बिल लाने का दबाव था। हिमाचल प्रदेश सरकार मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक तैनात करने जा रही है। विधानसभा सदन की कार्यवाही के लिए यह व्यवस्था पहली बार प्रदेश में बनाई जा रही है।
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा आदि राज्यों में यह व्यवस्था है। सचेतकों का काम विधानसभा सदन में सरकारी कार्य का खाका तैयार करना है। सरकार के बिल पेश करने पर विपक्ष ने इसका भारी विरोध किया था।
विपक्ष ने दोनों पदों को लाभ के पद की श्रेणी में बताया था। आशंका जताई जा रही थी कि नियुक्तियां कानूनी विवाद में उलझ सकती हैं। इसी के चलते राजभवन ने भी सभी पहलुओं को जांचने के बाद शनिवार को बिल को मंजूरी दी है।
कई विधायक हैं दौड़ में
विधेयक पारित होने के बाद मंत्री पद की दौड़ से बाहर रहे दो विधायकों की इन पदों पर ताजपोशी होगी, जिसको लेकर खींचतान तेज हो गई है। पूर्व मंत्री रमेश धवाला और नरेंद्र बरागटा के अलावा नूरपुर विधायक राकेश पठानिया मुख्य सचेतक की दौड़ में हैं। डिप्टी के लिए भी कई युवा विधायकों के नाम हैं। 22 मई को होने वाली विधायक दल की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी।
मिलेंगी ये सुविधाएं
- हिमाचल प्रदेश अधिनियम 2000 में मंत्रियों के लिए तय वेतन ही मुख्य सचेतक को मिलेंगे
- उप मुख्य सचेतक को अधिनियम के तहत राज्य मंत्रियों को देय सुविधाएं अनुमन्वय
- मंत्रियों के बराबर दैनिक भत्ता, प्रतिपूरक भत्ता, सत्कार भत्ता, वाहन भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य।
- नि:शुल्क हवाई, रियायती मोटर कार और गृह निर्माण ऋण, नि:शुल्क टेलीफोन सुविधा
- दोनों को मंत्रियों के समान आवासीय सुविधा का प्रावधान