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Shimla News: री-नीट परीक्षा की उपस्थिति को सार्वजनिक करे सरकार
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एसएफआई राष्ट्रीय अध्यक्ष का आग्रह
संगठन 4 जुलाई तक देशभर में करेगा विरोध प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। एसएफआई ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से 21 जून को हुई री-नीट परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की उपस्थिति का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग की।
संगठन ने प्रभावित छात्रों के परिवारों को पांच करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी की है। एसएफआई ने 29 जून से 4 जुलाई तक देशभर में एनटीए को समाप्त करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन की घोषणा की है। एसएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी ने शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान यह मांग उठाई। उन्होंने बताया कि पहली परीक्षा में करीब 22 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। री-नीट में 20 लाख से अधिक छात्रों के शामिल होने की जानकारी दी गई। ऐसे में करीब दो लाख अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल न होने की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। साजी ने आरोप लगाया कि परीक्षा रद्द होने और अनियमितताओं से छात्रों पर गंभीर मानसिक और आर्थिक दबाव पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया एक ऐसी कंपनी से करवाई गई जिसे कुछ राज्यों में ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है। एसएफआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर दिए बयान की आलोचना की।
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संगठन 4 जुलाई तक देशभर में करेगा विरोध प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। एसएफआई ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से 21 जून को हुई री-नीट परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की उपस्थिति का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग की।
संगठन ने प्रभावित छात्रों के परिवारों को पांच करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी की है। एसएफआई ने 29 जून से 4 जुलाई तक देशभर में एनटीए को समाप्त करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन की घोषणा की है। एसएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी ने शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान यह मांग उठाई। उन्होंने बताया कि पहली परीक्षा में करीब 22 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। री-नीट में 20 लाख से अधिक छात्रों के शामिल होने की जानकारी दी गई। ऐसे में करीब दो लाख अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल न होने की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। साजी ने आरोप लगाया कि परीक्षा रद्द होने और अनियमितताओं से छात्रों पर गंभीर मानसिक और आर्थिक दबाव पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया एक ऐसी कंपनी से करवाई गई जिसे कुछ राज्यों में ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है। एसएफआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर दिए बयान की आलोचना की।
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