सरकार ने विजिलेंस से पूछा क्यों बनाएं मित्रा को आरोपी
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धारा-118 के तहत जमीन खरीद मंजूरी की प्रक्रिया में कथित अवैध वसूली मामले में नया मोड़ आ गया है। प्रदेश सरकार ने विजिलेंस जांच पर अपनी पड़ताल बैठाते हुए पूछा है कि पूर्व मुख्य सचिव पी मित्रा को क्यों आरोपी बनाया जाए।
विजिलेंस की यह मांग फिलहाल सरकार ने नहीं मानी है। विजिलेंस से केस रिकॉर्ड तलब किया गया है। विजिलेंस ब्यूरो कई बार पी मित्रा सेे लंबी पूछताछ कर चुका है। जांच भी बहुत आगे बढ़ चुकी है, फिर भी मित्रा इस मामले में आरोपी नहीं हैं।
केवल व्यवसायी और अन्य लोग ही आरोपी हैं। नए विजिलेंस मैनुअल के अनुसार जांच एजेंसी को किसी भी मामले की जांच से पहले सरकार की मंजूरी लेनी जरूरी है। विजिलेंस ने इसी पर सरकार को चिट्ठी लिखी है।
क्या है मामला
2009-10 में तत्कालीन राजस्व मंत्री के यूओ नोट पर तत्कालीन प्रधान सचिव राजस्व पी मित्रा ने कसौली में एक रिजॉर्ट के लिए गैर हिमाचली को जमीन खरीद की अनुमति की फाइल सरकार को बढ़ाई। सरकार ने मंजूरी दे दी।
इसके बाद पी मित्रा की संबंधित व्यवसायी से हुई रिकॉर्डेड बातचीत सामने आई। विजिलेंस के अनुसार इसी रिकॉर्डिंग में अवैध वसूली का सुराग है। विजिलेंस ने व्यवसायी के वॉयस सैंपल लेने और पॉलीग्राफ टेस्ट की मंजूरी ले ली है। मित्रा के सैंपल लेने को भी कोर्ट में अरजी दी है।
विनीत चौधरी के मुख्य सचिव रहते खासी दिलचस्पी ले रही थी सरकार
मित्रा के बाद विनीत चौधरी मुख्य सचिव बनने के प्रबल दावेदार थे, मगर उन्हें सुपरसीड कर चौधरी के कनिष्ठ वीसी फारका सीएस बने। इसमें पी मित्रा मददगार बताए जाते हैं।
सरकार बदली तो फारका को हटाकर चौधरी मुख्य सचिव बनाए गए। यह जांच तेज हुई और सरकार ने इसमें खासी दिलचस्पी ली। चौधरी रिटायर हुए तो इसका जांच अधिकारी तक बदल दिया गया।
सरकार जानना चाहती है कि मित्रा को आरोपी बनाने के विजिलेंस के आग्रह के पीछे क्या तथ्य हैं। जांच एजेंसी को संबंधित रिकॉर्ड देेने कहा गया है।
- बीके अग्रवाल, मुख्य सचिव, हिमाचल सरकार