गुड न्यूज! मदरसों में लड़कियों को भी मिलेगी शिक्षा
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मदरसों में अब लड़कों के साथ साथ लड़कियों की शिक्षा का भी इंतजाम होगा। परंपरागत शिक्षा के अलावा मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को मार्डन एजूकेशन भी दी जाएगी। धर्म की शिक्षा के प्रसार के लिए छोटे मकतब बनाए जाएंगे।
अधिक से अधिक संख्या में मुस्लिम लड़के और लड़कियों को धर्म की शिक्षा देने के लिए मदरसों से जोड़ा जाएगा। अरबी के साथ साथ मदरसों में पढ़ने वालों को अब उर्दू की भी शिक्षा दी जाएगी।
सोमवार को शिमला के बालूगंज स्थित मदरसे में आयोजित हिमाचल और चंडीगढ़ के मदरसों के सम्मेलन में यह अहम फैसले लिए गए। सम्मेलन की अध्यक्षता नालागढ़ के हजरत मौलाना अब्दुस सुबहान ने की जबकि संचालन मौलाना मुमताज अहमद कासमी ने किया।
बेवजह बदनाम हो रहे मदरसें
मौलाना कबीरुद्दीन फारान ने अपने संबोधन में कहा कि बाहरी ताकतें मदरसों को बेवजह बदनाम करने में जुटी है। मदरसों में तालिबानी तैयार करने का आरोप लगाया जाता है जो सरासर गलत है।
उन्होंने बताया कि जन्म से लेकर मौत तक मुस्लिम समुदाय की सभी रस्में अरबी में निभाई जाती हैं और अरबी की शिक्षा मदरसों में ही मिल सकती है। मदरसे तो एक रब को मानने और खुद को अल्लाह से जोड़ने की शिक्षा दी जाती है।
बालूगंज मदरसे के शिक्षक और प्रवक्ता मुबारक अली रशीदी के अलावा सिरमौर से मौलाना कबीरुद्दीन फारान, चंडीगढ़ से काजी शमशेर अली और मौलाना मुहम्मद इमरान, बिलासपुर से मौलाना अब्दुल वहीद, चंबा से मुहम्मद अशरफ मदनी और अब्दुल रहमान, कुल्लू से मौलाना नवाब हाशमी, पौंटा साहिब से आफिज अतिउल्लाह, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद सीनियर सेकेंडरी स्कूल सुंदरनगर से मौलाना नूर अहमद नदवी, बरठी से मौलाना जाहिर अहमद सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।