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हिमाचल में हर व्यवसायी के कार्यस्थल की होगी जियो टैगिंग, जानिए पूरा मामला

Mon, 26 Aug 2019 06:02 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 26 Aug 2019 06:02 PM IST
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Geo tagging of every businessmans workplace will be done in Himachal
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल प्रदेश में हर व्यवसायी के कार्यस्थल की जियो टैगिंग होगी। चाहे वह दो गाय पालकर दूध बेचने वाला व्यवसायी हो या फिर कोई किराने की दुकान चलाने वाला हो। इसके लिए हिमाचल में भी सातवां आर्थिक सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। इस सर्वेक्षण की लांचिंग मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोमवार को राज्य सचिवालय में की। 

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मुख्यमंत्री ने देश में सभी आर्थिक प्रतिष्ठानों के विभिन्न परिचालन और संरचनात्मक पहलुओं पर जानकारी देने के लिए सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से 2019 में संचालित सातवीं आर्थिकी गणना (7वीं ईसी) की सोमवार को शुरुआत की। इस मौके पर सचिव वित्त, अर्थशास्त्र, सांख्यिकी और योजना अक्षय सूद, फील्ड परिचालन प्रभाग के उप महानिदेशक राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय हिमाचल प्रदेश क्षेत्र और आर्थिक सलाहकार विनोद राणा भी उपस्थित थे।

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डोर-टू-डोर सर्वे होगा, सरकारी योजनाओं में इस्तेमाल होगा डाटा  

Geo tagging of every businessmans workplace will be done in Himachal

यह डोर-टू-डोर सर्वे होगा। इसमें कौन किस व्यावसायिक गतिविधि में शामिल है इसका सारा ब्योरा एकत्र किया जाएगा। कितने लोगों को रोजगार प्राप्त है, वे किस तरह से रोजगार से जुडे़ हैं। इसमें हर छोटे उद्यम से लेकर बड़े उद्योग तक का बारीकी से सर्वेक्षण होगा।

प्रदेश और केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने के लिए इस तरह के डाटा का इस्तेमाल हो सकेगा। सांख्यिकीय संग्रहण अधिनियम 2008 के प्रावधानों के तहत प्रत्येक परिवार और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के आंकड़ों का सर्वेक्षण घर-घर जाकर किया जाएगा।

परिवारों एवं प्रतिष्ठान स्तर के आंकड़ों को पूर्णतया गोपनीय रखा जाएगा। प्रगणकों की ओर से एकत्रित आंकड़ों को संबंधित प्रतिष्ठानों और परिवारों का दौरा कर पर्यवेक्षकों की ओर से सत्यापित किया जाएगा। 

मोबाइल ऐप पर इकट्ठा होगा डाटा 

मोबाइल ऐप पर इकट्ठा होगा डाटा 
गणनाकारों और सुपरवाइजरों को डाटा एकत्रित करने, सत्यापन, रिपोर्ट तैयार करने और प्रसार करने के लिए विकसित की मोबाइल ऐप पर डाटा इकट्ठा करने का प्रशिक्षण दिया गया है। इस मोबाइल ऐप को सेवंथ इकोनॉमिक सेंसस नाम दिया गया है।  

तीन महीने में सर्वेक्षण पूरा करने का लक्ष्य 
यह तय किया गया है कि इस सर्वेक्षण को आगामी तीन महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। साल 2012-13 में हिमाचल प्रदेश में छठा आर्थिक सर्वेक्षण किया गया था। राज्य में सवर्णों को दिया गया आरक्षण भी इसी सर्वेक्षण के आधार पर दिया गया। अब यह सातवां होगा। इससे और भी सटीक आंकड़े सामने आएंगे। 
टोल फ्री नंबर का कर सकेंगे इस्तेमाल 
प्रगणकों, पर्यवेक्षकों एवं नागरिकों के प्रश्नों के समाधान के लिए क्षेत्रीय भाषा में एक समर्पित सहायता केंद्र टोल फ्री नंबर 1800-3000-3468 स्थापित किया गया है। सातवीं आर्थिक गणना के आयोजन के विभिन्न पहलुओं पर सूचना के प्रसार को सुगम बनाने के लिए सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की वेबसाइट पर एक वेब पेज http://mospi.nic.in भी बनाया गया है। 

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