CDS General Bipin Rawat: सेनाध्यक्ष रहते सूबाथू में बना गोरखा हैट पहनना पसंद करते थे जनरल बिपिन रावत
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...अगर कोई कहे कि उसे मौत से डर नहीं लगता तो वह या तो झूठ बोल रहा है या फिर वह गोरखा है। पूर्व जनरल मॉनेक शॉ के ये शब्द गोरखा रेजिमेंट की बहादुरी और शौर्य बयां करने के लिए काफी हैं। देश में बहादुर सैनिकों की चर्चा की जाए तो तिरछी गोरखा हैट में दिखने वाली गोरखा रेजिमेंट का जिक्र जरूर किया जाता है। रेजिमेंट को ऐसे ही नहीं बहादुर फौज का तमगा मिला है।
गोरखा फौज ने रणभूमि में अपने शौर्य का पराक्रम दिखाने के साथ देश के लिए शहादत पाकर बहादुर रणबांकुरे का नाम हासिल किया है। इन दिनों चीन से तनातनी को लेकर चर्चा में आए सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) जनरल बिपिन रावत सुबाथू छावनी में बनने वाले गोरखा हैट के मुरीद हैं।
दिलचस्प है कि सुबाथू के कारीगर अशोक थापा के हाथों से बना हैट जनरल बिपिन रावत को काफी पसंद है। थलसेनाध्यक्ष रहते हुए वो इसे पहनते थे। पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सोहाग को भी यह हैट काफी पसंद थी।
रावत के सिर पर गोरखा रेजिमेंट का ताज रखने का अवसर भी सुबाथू के अशोक थापा को मिला है। थापा ने बताया कि 25 वर्षों से वह रेजिमेंट के लिए गोरखा हैट बना रहे हैं। जनरल रावत से उनका सीधा संपर्क तो नहीं हुआ, लेकिन 14 जीटीसी के सेना अधिकारियों के माध्यम से जनरल रावत के लिए गोरखा हैट बनाने का अवसर मिला।
इसके लिए उन्हें चार दिन लगे थे, जिसे पहनकर जनरल रावत ने अशोक थापा की प्रशंसा भी की है। अशोक थापा ने बताया कि सुबाथू 14 जीटीसी में वन जीआर और फोर जीआर के सैनिकों के लिए गोरखा हैट तैयार की जाती है। दोनों जीआर की पहचान उनकी गोरखा हैट पर लगी पट्टी से होती है।
सेना में सीनियर रैंक के अनुसार गोरखा हैट में पट्टी लगाई जाती है। इस बार भी जनरल रैंक का हैट तैयार किया जा रहा है, जिसका कभी भी ऑर्डर आ सकता है। दूसरी ओर सेना के सुविधा केंद्र में गोरखा हैट बना रहे जनकराज ने बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से गोरखा रेजिमेंट के वन जीआर व फोर जीआर के लिए गोरखा हैट बना रहे हैं।
सुबाथू में 1815 से तैयार हो रहे बहादुर गोरखा देशभर में तिरछी गोरखा हैट में दिखने वाली रेजिमेंट को तैयार करने में जिला सोलन के सुबाथू 14 जीटीसी का सन 1815 से विशेष योगदान रहा है। सुबाथू 14 जीटीसी में 42 सप्ताह की कड़ी ट्रेनिंग के बाद नौजवान सैनिकों का सपना उस समय पूरा होता है, जब शपथ समारोह के दौरान उनके सिर पर रेजिमेंट की तिरछी गोरखा हैट ताज बन जाती है। एक जमाने में पूरे प्रदेश के साथ खच्चरों के माध्यम से व्यापार करने के कारण वैसे तो सुबाथू छावनी ने पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है।