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बधिर बच्चों का अब किया जाएगा मुफ्त इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 14 Aug 2015 10:05 AM IST
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बहरेपन का दर्द ताउम्र झेलने वालों को अब निराश होने की जरूरत नहीं है। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से यह जन्मजात बीमारी मुफ्त में दूर हो सकती है। विशेष तौर पर चार से पांच वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए यह तकनीक बेहद सफल है। राज्य के सबसे बड़े इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (आईजीएमसी) में जन्मजात बधिर बच्चों के लिए कॉकलियर इम्प्लांट लगाने की सुविधा है।
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वीरवार को यहां जन्म से बहरेपन के शिकार दो बच्चों की सफल सर्जरी की गई। इनमें शिमला के अरव की उम्र चार साल है जबकि मंडी के सरकाघाट के प्रगुण की उम्र तीन साल है। सर्जरी ईएनटी विभाग के मुखिया प्रोफेसर एनके महेंद्रू के नेतृत्व में की गई। एक सर्जरी में तीन घंटे का वक्त लगा। दोनों बच्चों को वार्डों में शिफ्ट कर दिया गया है। ये कुछ दिन डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे। इसके बाद इन्हें घर भेज दिया जाएगा। हालांकि एक साल तक महीने में दो बार इन बच्चों को जांच के लिए अस्पताल लाना होगा।
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उल्लेखनीय है कि बीते साल भी ऐसी ही एक सफल सर्जरी की गई थी। एक सर्जरी में करीब पांच से छह लाख रुपये खर्च आता है। हालांकि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत यह इलाज निशुल्क है। इसका पूरा खर्च सरकार उठाती है। अरव और प्रगुण का खर्च भी सरकार ने उठाया। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दोनों बच्चों के ऑपरेशन निशुल्क किए गए हैं।
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ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एनके महेंद्रू ने कहा कि बच्चों में बहरेपन का इलाज चार-पांच वर्ष की उम्र में किया जाए तो उत्साहजनक नतीजे आते हैं। इसे ‘कॉकलियर इम्प्लांट’ कहते हैं। इसमें बच्चों के कान की सर्जरी कर एक छोटी मशीन को इनप्लांट किया जाता है। इससे बच्चे की सुनने और बोलने की शक्ति बढ़ जाती है।