और उलझी फोरेस्ट गार्ड की हत्या की गुत्थी, डायरी से हुआ बड़ा खुलासा
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फोरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की हत्या की गुत्थी और उलझ गई है। पुलिस ने मृतक की एक डायरी बरामद की है। जिसमें उसने दादी के नाम संदेश लिखते हुए चार लोगों से जान का खतरा बताया था। पुलिस ने इसी आधार पर चारों लोगों को हत्या के आरोप में राउंडअप में लिया है।
पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। मृतक ने अपनी डायरी में लिखा है कि चारों अवैध कटान करते हैं। जब उन्हें कटान से रोका जाता तो उसे वे तंग करते हैं और धमकियां भी देते हैं। उधर, पुलिस ने जांच के दौरान जहर की दो शीशियां भी बरामद की हैं। जिसमें एक शीशी बैग में और दूसरी मृतक के क्वार्टर में मिली है।
घटना स्थल के पास दो जगह पुलिस को उल्टी किये जाने के निशान भी मिले हैं। पुलिस ने उल्टी के नमूनों को फारेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस इस पहलू में भी जांच कर रही है कि कहीं फोरेस्ट गार्ड को जबरन जगह खिला कर पहले मार दिया फिर शव को पेड़ पर लटकाया गया। इसके साथ पुलिस मामले में आत्महत्या से भी जोड़कर भी जांच कर रही है।
होशियार की कलाइयां भी कटी हुई थीं
पुलिस के मुताबिक ऐसा भी हो सकता है कि धमकियों से तंग आकर होशियार ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या के सवाल को होशियार के परिजन और गांव वाले सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि जहर खाने के बाद वह पेड़ पर पंद्रह से बीस फीट की ऊंचाई पर चढ़कर उल्टा क्यों लटका गया।
होशियार सिंह के सिर पर चोटों के निशान के साथ कलाइयां भी कटी हुई मिली है, जिससे हत्या का मामला और उलझ गया है। एसपी पीके ठाकुर ने कहा कि डायरी में दादी के नाम संदेश मिला है। जिसमें घनश्याम, अनिल, हेतराम, लोभ सिंह के नामों का जिक्र है। पुलिस ने चारों को हत्या के आरोप में राउंडअप किया है। जांच जारी है। एफएसल की रिपोर्ट में साफ हो जाएगा। चिकित्सक पोस्टमार्टम रिपोर्ट को दबाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
‘माफिया ने बेटे को नहीं सरकार को उल्टा लटकाया’
फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत से परिजन और ग्रामीणों में उबाल है। मृतक को पूरे गांव का बेटा बताते हुए ग्रामीणाें ने कहा है कि वन माफिया ने गांव के बेटे को नहीं बल्कि सरकार को पेड़ पर उल्टा लटकाया है। वन माफिया राज में सरकारी तंत्र न सिर्फ बेबस नजर आ रहा है बल्कि उसकी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि गांव के बेटे की मौत पर उन्हें सहानुभूति नहीं बदला चाहिए। इसके लिए उन्हें सड़कों पर भी उतरना पड़ा तो गुरेज नहीं करेंगे। शनिवार को होशियार सिंह के घर पर पहुंचे ग्रामीणों की आंखों में आक्रोश झलकता रहा। जवान पोते को खोने वाली बदहवास दादी को ढांढस बंधाते ग्रामीण रह रह कर सरकार को कोस रहे थे।
होशियार के चाचा परसराम ने कहा कि यदि माफिया पर शिकंजा न कसा गया तो आज फॉरेस्ट गार्ड कल पुलिस और फिर बड़े अफसरों की बारी होगी। पंचायत के उपप्रधान कुंदन ने कहा गांव के बेटे ने ड्यूटी के लिए जान की कुर्बानी दी है। अगर एक माह में कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण सड़क पर उतरेंगे। घर पर पहुंचीं महिलाओं का गुस्सा भी सातवें आसमान पर था।
न तो वॉकी-टॉकी की सुविधा, जंगलों में भी मोबाइल सिग्नल नहीं होता
वन विभाग के कर्मचारी तो सूबे की बहुमूल्य वन संपदा को बचाने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन सरकार और विभाग इन कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं। पिछले दो साल में वन कर्मियों पर करीब एक दर्जन से ज्यादा हमले हो चुके हैं। कई मामलों में एफआईआर भी हुई।
लेकिन न तो विभाग ने मामलों में फॉलोअप किया और न ही पुलिस जांच में गंभीरता बरत रही है। इसी का नतीजा है कि मारपीट और पथराव करने वाले माफिया का मनोबल हत्या कर पेड़ से लटकाने तक पहुंच गया है। विभाग और सरकार भी इन कर्मियों को असलहा तक दे पाने में नाकाम रहे हैं। सरकार की इसी अनदेखी और वन माफिया बेखौफ गतिविधियां वन कर्मियों के मनोबल को तोड़ने लगी हैं।
अधिकारी मार खा रहे और नेता समझौता करवाने में जुटे
एचपी फॉरेस्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष तुलसीराम शर्मा कहते हैं कि सरकार अगर ऊना वाली घटना के बाद संवेदनशील बीट के कर्मियों को असलहा देने की घोषणा को पूरा करती तो आज इतनी बड़ी वारदात नहीं होती। कर्मचारियों के पास वॉकी-टॉकी जैसी सुविधा भी नहीं हैं।
जंगलों में कई जगह तो मोबाइल का सिग्नल भी नहीं होता है। ऐसे में कर्मचारी संपर्क भी नहीं कर पाते। एक साल बाद भी सरकार असलहा रखने और आवंटन के लिए प्रोटोकाल तक नहीं बना पाई है। शर्मा ने कहा कि अधिकारी मार खा रहे हैं और नेता समझौता कराने में जुटे हैं। ऐसे में वन माफिया के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वह हत्या करने से भी गुरेज नहीं कर रहा है।
वन कर्मियों पर कब-कब हुए हमले
- मार्च 2017 में कोटी रेंज में कांबिंग कर रहे फॉरेस्ट गार्ड पर वन काटुओं का हमला
- 3 अप्रैल 2017 को पांवटा डिवीजन में गश्त कर रहे फॉरेस्ट गार्ड से मारपीट
- 9 अप्रैल 2017 को ज्वाली में फॉरेस्ट वर्कर से मारपीट, फोन छीना, पुलिस में शिकायत
- 7 अप्रैल 2017 को शिलाई में पेड़ कटान रोकने पर वन कर्मियों की पिटाई
- अप्रैल 2017 में पहले फॉरेस्ट गार्ड को अतिक्रमण रोकने पर ठियोग में बंधक बनाकर पीटा
- 30 मई 2017 को पांवटा डिवीजन में ही बीओ और फॉरेस्ट गार्ड से मारपीट
- चौपाल में वन काटुओं ने 2016 में गश्त कर रहे वनरक्षक पर हमला
- 18 फरवरी 2016 पर ऊना में मारपीट हुई, डीएफओ समेत आधा दर्जन कर्मी हुए घायल
- दो साल पहले रेह रेंज में फारेस्ट गार्ड और फॉरेस्ट वर्कर को वन माफिया ने पीटा
मंत्री बोले- सुरक्षा में नहीं होगा समझौता
वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी कहते हैं कि वन कर्मियों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह वन कर्मियों से जुड़े सभी मामलों की जांच जल्द पूरी कर सख्ती से कार्रवाई करें।
हालांकि, डेढ़ साल पहले विधानसभा में असलहा मुहैया कराने की घोषणा अब तक पूरी न होने पर उन्होंने गृह विभाग पर ठीकरा फोड़ दिया। बोले - गृह विभाग से मंजूरी मिलने में समय लगा, अब मंजूरी मिलने के साथ ही विभागीय अफसरों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।
माफिया की सक्रियता से इंकार नहीं, कर्मियों को हथियार दिलाएंगे
वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल में वन माफिया की सक्रियता से वे इंकार नहीं करते हैं। सरकार वन कर्मियों को हथियार दिलाने का प्रयास करेगी। करसोग में हुई वनकर्मी की हत्या पर कहा कि सरकार इस मामले में न्याय करेगी। दोषियों को सजा होगी।