{"_id":"618ab0d6fb4149330b4dfad1","slug":"forest-department-not-decided-to-kill-leporad-shimla-news-sml3897259137","type":"story","status":"publish","title_hn":"तेंदुए की पहचान न होने से टला मारने का फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तेंदुए की पहचान न होने से टला मारने का फैसला
विज्ञापन
forest Department not decided to kill leporad
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विभाग को शहर में अलग-अलग जगह से मिल रही तेंदुआ दिखने की शिकायतें
विभाग बोला, पहचान हुई तो मार देंगे तेंदुआ
ट्रांक्यूलाइजर मशीन लेकर तेंदुए को ढूंढ रही टीमें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के डाउनडेल इलाके से पांच साल के मासूम को उठाकर ले जाने वाले तेंदुए को आदमखोर घोषित कर मारने का मामला उलझ गया है। वन विभाग को बीते पांच दिन में शहर के अलग-अलग जगहों पर तेंदुआ दिखने की शिकायतें मिली हैं। क्या यह एक ही तेंदुआ है या फिर कई और तेंदुए इस इलाके में घूम रहे हैं।
यदि एक से ज्यादा तेंदुए हैं तो इनमें से कौन सा मारा जाना है, इस पर उलझन बढ़ गई है। वन विभाग का कहना है कि तेंदुए को आदमखोर घोषित करने में एक मिनट नहीं लगेगा लेकिन किसे आदमखोर घोषित करना है और किसे मारना है, पहले उसकी पहचान भी तो जरूरी है। वन विभाग ने मंगलवार शाम तक इस पर फैसला लेने का दावा किया था। अब विभाग का कहना है कि बच्चे को उठाकर ले जाने वाले तेंदुए की पहचान होने पर ही आगे का फैसला लिया जाएगा। हालांकि विभाग यह भी दावा कर रहा है कि बुधवार शाम तक इस पर कोई फैसला ले लिया जाएगा।
वन विभाग के अनुसार इस एरिया में लगाए गए एक दर्जन ट्रैप कैमरों में तेंदुए की कोई मूवमेंट नजर नहीं आई है। पिंजरे में भी तेंदुआ नहीं फंस रहा। ऐसे में पहले उस तेंदुए की पहचान जरूरी है जिसे आदमखोर घोषित किया जाना है। विभाग के अनुसार यदि किसी जानवर को आदमखोर घोषित करना है तो उसकी हिस्ट्री और पहचान होना जरूरी है। जल्दबाजी में यदि कोई दूसरा जानवर मारा गया तो खतरा फिर भी बरकरार रहेगा।
विज्ञापन
अतिरिक्त पीसीसीएफ की अगुवाई में चलेगा अभियान
वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने या मारने के लिए चल रहे अभियान का जिम्मा अतिरिक्त पीसीसीएफ अनिल ठाकुर को सौंप दिया है। अनिल ठाकुर मंगलवार से खुद फील्ड में उतरकर तेंदुए को पकड़ने के लिए चल रहे अभियान का जायजा ले रहे हैं। वन विभाग ने ट्रांक्यूलाइजर मशीनों के साथ भी टीमें फील्ड में उतार दी हैं। इसके अलावा तेंदुए को मारने को लेकर दूसरे जिलों के शूटरों से भी संपर्क साधा गया है।
जिंदा पकड़ा तो चिड़ियाघर नहीं
रेस्क्यू सेंटर में होगी अब उम्रकैद
वन विभाग का कहना है कि अभी इस तेंदुए को जिंदा पकड़ने की कोशिश की जा रही है। यदि इसे जिंदा पकड़ लिया जाता है तो इसे चिड़ियाघर नहीं बल्कि रेस्क्यू सेंटर में भेजा जाएगा। यह पूरी उम्र रेस्क्यू सेंटर में ही बंद रहेगा। नियमानुसार ऐसे जानवरों को चिड़ियाघर में नहीं रख सकते। इन्हें रेस्क्यू सेंटर भेजना पड़ता है। वहां इनके रहने के प्रबंध किए जाते हैं। इन्हें कभी बाहर नहीं छोड़ा जाता। प्रदेश वन विभाग के पास पहले भी एक तेंदुआ रेस्क्यू सेंटर में बंद था। बाद में इसे गुजरात रेस्क्यू सेंटर की मांग पर वहां भेज दिया था।
विज्ञापन
विभाग बोला, पहचान हुई तो मार देंगे तेंदुआ
ट्रांक्यूलाइजर मशीन लेकर तेंदुए को ढूंढ रही टीमें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के डाउनडेल इलाके से पांच साल के मासूम को उठाकर ले जाने वाले तेंदुए को आदमखोर घोषित कर मारने का मामला उलझ गया है। वन विभाग को बीते पांच दिन में शहर के अलग-अलग जगहों पर तेंदुआ दिखने की शिकायतें मिली हैं। क्या यह एक ही तेंदुआ है या फिर कई और तेंदुए इस इलाके में घूम रहे हैं।
यदि एक से ज्यादा तेंदुए हैं तो इनमें से कौन सा मारा जाना है, इस पर उलझन बढ़ गई है। वन विभाग का कहना है कि तेंदुए को आदमखोर घोषित करने में एक मिनट नहीं लगेगा लेकिन किसे आदमखोर घोषित करना है और किसे मारना है, पहले उसकी पहचान भी तो जरूरी है। वन विभाग ने मंगलवार शाम तक इस पर फैसला लेने का दावा किया था। अब विभाग का कहना है कि बच्चे को उठाकर ले जाने वाले तेंदुए की पहचान होने पर ही आगे का फैसला लिया जाएगा। हालांकि विभाग यह भी दावा कर रहा है कि बुधवार शाम तक इस पर कोई फैसला ले लिया जाएगा।
विज्ञापन
वन विभाग के अनुसार इस एरिया में लगाए गए एक दर्जन ट्रैप कैमरों में तेंदुए की कोई मूवमेंट नजर नहीं आई है। पिंजरे में भी तेंदुआ नहीं फंस रहा। ऐसे में पहले उस तेंदुए की पहचान जरूरी है जिसे आदमखोर घोषित किया जाना है। विभाग के अनुसार यदि किसी जानवर को आदमखोर घोषित करना है तो उसकी हिस्ट्री और पहचान होना जरूरी है। जल्दबाजी में यदि कोई दूसरा जानवर मारा गया तो खतरा फिर भी बरकरार रहेगा।
विज्ञापन
अतिरिक्त पीसीसीएफ की अगुवाई में चलेगा अभियान
वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने या मारने के लिए चल रहे अभियान का जिम्मा अतिरिक्त पीसीसीएफ अनिल ठाकुर को सौंप दिया है। अनिल ठाकुर मंगलवार से खुद फील्ड में उतरकर तेंदुए को पकड़ने के लिए चल रहे अभियान का जायजा ले रहे हैं। वन विभाग ने ट्रांक्यूलाइजर मशीनों के साथ भी टीमें फील्ड में उतार दी हैं। इसके अलावा तेंदुए को मारने को लेकर दूसरे जिलों के शूटरों से भी संपर्क साधा गया है।
जिंदा पकड़ा तो चिड़ियाघर नहीं
रेस्क्यू सेंटर में होगी अब उम्रकैद
वन विभाग का कहना है कि अभी इस तेंदुए को जिंदा पकड़ने की कोशिश की जा रही है। यदि इसे जिंदा पकड़ लिया जाता है तो इसे चिड़ियाघर नहीं बल्कि रेस्क्यू सेंटर में भेजा जाएगा। यह पूरी उम्र रेस्क्यू सेंटर में ही बंद रहेगा। नियमानुसार ऐसे जानवरों को चिड़ियाघर में नहीं रख सकते। इन्हें रेस्क्यू सेंटर भेजना पड़ता है। वहां इनके रहने के प्रबंध किए जाते हैं। इन्हें कभी बाहर नहीं छोड़ा जाता। प्रदेश वन विभाग के पास पहले भी एक तेंदुआ रेस्क्यू सेंटर में बंद था। बाद में इसे गुजरात रेस्क्यू सेंटर की मांग पर वहां भेज दिया था।