{"_id":"5b03a00f4f1c1be8408b6dea","slug":"for-the-first-time-aarti-of-the-river-sutlej-on-the-lines-of-ganga","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गंगा की तर्ज पर पहली बार हुई हिमाचल में बहने वाली इस नदी की आरती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा की तर्ज पर पहली बार हुई हिमाचल में बहने वाली इस नदी की आरती
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Updated Tue, 22 May 2018 10:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल में बहने वाली इस प्रमुख नदी की गंगा की तर्ज पर पहली बार आरती की गई। समुद्र तल से करीब 4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सतलुज नदी पर बने नाथपा-झाकड़ी बांध पर सोमवार को पहली बार सतलुज की आरती की गई।
विज्ञापन
बनारस और हरिद्वार की गंगा आरती की तर्ज पर यह पहल सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएनएल) ने की है। पहली बार इस आयोजन से सतलुज नदी का आध्यात्मिक गौरव बनाए रखने की कोशिश की गई है।
विज्ञापन
यहां जानिए क्या है सतलुज नदी का महत्व
साथ ही इस आरती के जरिये क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया है। सतलुज आराधना कार्यक्रम के अवसर पर निगम के मुखिया नंदलाल शर्मा ने बताया कि दक्षिण पश्चिम तिब्बत में मानसरोवर के पश्चिम में राक्षस
ताल से उद्गम हुई सतलुज नदी करीब 400 किलोमीटर बहने के बाद किन्नौर के शिपकी में जास्कर पर्वत शृंखला को काटते हुए हिमाचल में प्रवेश करती है। इस नदी का बहाव दक्षिण पश्चिम की तरफ है और इसकी कुल लंबाई लगभग 1450 किलोमीटर है।
जानकारों के अनुसार ऋगवेद में भी इस नदी का उल्लेख सतलुज के पुराने नाम शुतुद्रि के तौर पर दर्ज है। बताया कि इस नदी पर नाथपा झाकड़ी हाईड्रो पावर स्टेशन, रामपुर जल विद्युत स्टेशन, करछम वांगटू प्रोजेक्ट जैसी हाईड्रो पावर परियोजनाएं हैं।
उम्मीद जताई कि आरती के बाद मिलने वाले सम्मान से नदी न सिर्फ लोगों की मनोकामनाओं को पूरा करेगी बल्कि सभी परियोजनाओं पर अपना आशीर्वाद बनाए रखेगी।
ताल से उद्गम हुई सतलुज नदी करीब 400 किलोमीटर बहने के बाद किन्नौर के शिपकी में जास्कर पर्वत शृंखला को काटते हुए हिमाचल में प्रवेश करती है। इस नदी का बहाव दक्षिण पश्चिम की तरफ है और इसकी कुल लंबाई लगभग 1450 किलोमीटर है।
जानकारों के अनुसार ऋगवेद में भी इस नदी का उल्लेख सतलुज के पुराने नाम शुतुद्रि के तौर पर दर्ज है। बताया कि इस नदी पर नाथपा झाकड़ी हाईड्रो पावर स्टेशन, रामपुर जल विद्युत स्टेशन, करछम वांगटू प्रोजेक्ट जैसी हाईड्रो पावर परियोजनाएं हैं।
उम्मीद जताई कि आरती के बाद मिलने वाले सम्मान से नदी न सिर्फ लोगों की मनोकामनाओं को पूरा करेगी बल्कि सभी परियोजनाओं पर अपना आशीर्वाद बनाए रखेगी।