राशनकार्ड धारकों पर गिरेगी महंगाई की गाज!
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हिमाचल प्रदेश में गेहूं पिसाई के रेट दर बढ़े तो राशनकार्ड उपभोक्ताओं को आटा करीब 2 रुपये प्रति किलोग्राम महंगा मिलेगा। इससे सीधे तौर पर प्रदेश के साढ़े बारह लाख उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ पड़ेगा।
खास बात यह है कि प्रदेश की वित्तीय हालत ठीक न होने के कारण सरकार इस बोझ को उठाने को तैयार नहीं है। केंद्र सरकार प्रदेश के उपभोक्ताओं को 6.25 रुपये गेहूं उपलब्ध करा रही है। प्रदेश खाद्य आपूर्ति विभाग का मानना है कि प्रदेश सरकार गेहूं की खुद पिसाई करके प्रदेश के एपीएल परिवारों को आटा मुहैया करा रहा है।
पिसाई, ढुलाई और पैकिंग का पूरा खर्च राशनकार्ड उपभोक्ताओं से ही वसूल किया जा रहा है। ये पूरा खर्च मिलाकर उपभोक्ताओं को साढे़ आठ रुपये प्रति किलोग्राम आटा दिया जा रहा है।
प्रति किलो पिसाई के मिल रहे 60 पैसे
प्रदेश में 80 मिल हैं जहां गेहूं की पिसाई की जा रही है। मिल मालिक 60 पैसे प्रति किलोग्राम पिसाई रेट ले रहे हैं। रेट 1.20 रुपये हुआ तो आटा 10.50 रुपये के आसपास किलो मिलेगा। इधर, उपभोक्ता मंत्री मिल मालिकों की मांगें मानने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि जनता पर कोई बोझ नहीं डाला जाएगा।
1.20 पिसाई रेट मांग रहे मिल मालिक
मिल मालिक एसोसिएशन प्रदेश सरकार से 1.20 रुपये पिसाई रेट करने की मांग कर रहे हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर रेट नहीं बढ़ता है तो 23 जनवरी से गेहूं नहीं उठाएंगे।
एसोसिएशन बोली, जनता पर पड़ेगा बोझ
एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपिंद्र पाल गुप्ता ने बताया कि अगर सरकार आटे की जगह गेहूं देती है तो इसकी सीधी मार जनता पर पड़ेगी। लोगों को कई किलोमीटर दूर गेहूं पिसाने चक्की मालिक के पास जाना पड़ेगा। 10 किलो गेहूं पिसाने पर उपभोक्ताओं को 8 किलोग्राम ही आटा मिलेगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपिंद्र पाल गुप्ता ने बताया कि 2007 में एक क्विंटल गेहूं पिसाई पर 25 रुपये बिजली खर्च आता था। 8 साल से बिजली के रेट कई बार बढ़े हैं लेकिन पिसाई रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। आज एक क्विंटल गेहूं की पिसाई पर 45 से 47 रुपये बिजली का खर्चा बैठ रहा है, इसके चलते सरकार से पिसाई रेट बढ़ाने की मांग की जा रही है।
डिपो में आटे के बदले गेहूं दिए जाने से मिलों में काम कर रहे 10,000 लोग बेरोजगार हो जाएंगे। हालांकि अभी मिल मालिकों की सरकार के साथ वार्तालाप जारी है। अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।