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शिमला रेप केसः पुलिस की नजरों में जो मुजरिम बनाए, वे अब छूट गए

Sun, 03 Dec 2017 02:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 03 Dec 2017 02:56 PM IST
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 five suspect in gudiya rape and murder case bailed out

बहुचर्चित गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस ने मामले में जिन लोगों को मुजरिम बनाया, सीबीआई की जांच में उन्हीं को क्लीन चिट मिल गई।

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पुलिस की नजरों में जो मुजरिम बनाए गए, वे डीएनए मिलान नहीं होने पर छूट गए। नार्को टेस्ट, पुलिस वालों के फोन की वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य सबूतों के अलावा डीएनए का मिलान न हो पाना उनके छूटने का बड़ा आधार बना। 
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गुड़िया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सीबीआई की जांच में अहम रोल निभाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद एफटीए कार्ड पर आईजीएमसी के डॉक्टरों ने जो नमूने दिए, उन्हीं से सीबीआई को डीएनए मिला।

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....तो गुड़िया केस की गुत्थी सुलझ जाती

 five suspect in gudiya rape and murder case bailed out

दांदी जंगल से ठीक से नमूने लिए जाते तो गुड़िया केस की गुत्थी को सुलझाने में इतनी मुश्किल न होती, अगर स्थानीय पुलिस और फोरेंसिक निदेशालय के अधिकारियों की लापरवाही नहीं बरतते। यहां केवल आईजीएमसी शिमला के फोरेंसिक चिकित्सकों की सूझबूझ ही काम आई। 

सूत्रों ने बताया कि बेशक गुड़िया केस से जुडे़ सूरज हत्याकांड में आईजीएमसी के डाक्टरों का ओपिनियन एम्स के मेडिकल बोर्ड की तरह बहुत साफ नहीं आया हो, मगर गुड़िया के शव के पोस्टमार्टम में इन्हीं चिकित्सकों ने सीबीआई को जांच का एक मजबूत आधार दिया। 

पोस्टमार्टम से बनाए गए एफटीए कार्ड से सीबीआई को डीएनए मिला है। ये डीएनए डाक्टरों की ओर से एफटीए कार्ड पर सौंपे गए नमूने से निक ला है। छह जुलाई को जब सुबह दांदी जंगल में गुड़िया की लाश निर्वस्त्र अवस्था में गिरी पाई गई तो यहां सबसे पहले स्थानीय पुलिस पहुंची।

इन कारणों से उलझी मामले की जांच

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फोरेंसिक निदेशालय शिमला से एकमात्र अधिकारी दोपहर बाद पहुंचा। तब तक पुलिस यहां स्पॉट में कई तरह की छेड़खानी कर चुकी थी। फ ोरेंसिक विशेषज्ञ बायोलॉजिकल डिविजन से संबंधित था। वह केवल गुड़िया के शव को ही देख सकता था।

सूत्रों ने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने इस विशेषज्ञ के साथ कोई तालमेल नहीं बनाया। हर काम में जल्दबाजी ही दिखाई, जिससे वह स्पॉट से भी शव के सैंपल ठीक से नहीं ले पाया। फिजिकल डिविजन से कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं गया।

अगर जाता तो आसपास के माहौल से भी सबूत एकत्र कर सकता था। सीबीआई के पहुंचने तक तो ये पूरा क्षेत्र ही खुर्द-बुर्द हो चुका था। बाद में आईजीएमसी के डाक्टरों ने गुड़िया के शव के जगह-जगह से 184 फोटो खींचकर पुलिस और सीबीआई दोनों को दिए।

वहीं एफटीए कार्ड पर उसके शव से जमे हुए तरल पदार्थों को निकालकर एकत्र किया गया। इसी से सीबीआई को कातिल और दुराचारी का डीएनए मिला है। इन्हीं से लोगों से लिए गए नमूनों का मिलान किया जा रहा है।

ऐसे गुड़िया से दरिंदगी कर उतारा मौत के घाट

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सीबीआई सूत्रों की मानें तो आईजीएमसी शिमला की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर विश्वास करें तोे गुड़िया को सात से 15 मिनट तक उसका सांस रोककर मारा गया। सांस रोकने के तीन मिनट बाद ही वह बेहोश हो गई होगी। उसका मुंह और गला दोनों ही दबाए गए।

उसके पीठ की खरोचें ये संभावना भी बताती है कि उसके साथ दुराचार दांदी जंगल में ही हुआ हो और यहीं चार जुलाई को करीब पांच से छह बजे के बीच उसे मारा गया हो। मारे जाने से दो से चार घंटे पहले गुड़िया ने चावल के साथ कड़ी या दाल जैसी कोई चीज खाई।

चावल के दानों का भी सीबीआई स्थानीय राशन की दुकानों से मिलान कर रही है। गर्दन के नीचे उस पर दांतों के निशानों का भी पुलिस के पकड़े आरोपियों से मिलान करवाया गया, जो मिलान नहीं कर रहे। हालांकि, सीबीआई अभी अपनी जांच में किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची कि ये गैंगरेप था कि एक आदमी का किया हुआ दुराचार।

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