हिमाचल में तबाह हो गईं फसलें, अब तक 500 करोड़ की चपत
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हिमाचल प्रदेश में पिछले अरसे से लगातार हो रही भारी बारिश, तूफ ानी हवाओं और ओलावृष्टि से फसलों की भारी तबाही हुई है। राज्य सरकार के कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारियों का अंदाजा है कि रबी सीजन को इस बार 500 करोड़ रुपये तक की चपत लग चुकी है।
जबकि पिछले दो-तीन सप्ताह में ही हिमाचल में फसलों का करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। मंगलवार को हुई भारी ओलावृष्टि से जिला शिमला में लगभग 10 करोड़ का नुकसान हो चुका है। यह आंकड़ा 50 करोड़ तक जा सकता है।
सोलन जिले में तो करीब पौने चार करोड़ रुपये के टमाटर बर्बाद हो गए। शिमला, मंडी आदि में भी सेब और सब्जियाें की फसलों को खासा नुकसान हुआ है। कई क्षेत्रों में खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल भी बर्बाद हो गई।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक रबी सीजन में सेब, स्टोन फ्रूट और गेहूं की करीब 500 करोड़ रुपये तक की फसलें तबाह हो चुकी हैं। हालांकि, अब तक हुए नुकसान का असल आकलन करना अभी बाकी है।
सेब, नाशपाती, आड़ू, खुमानी, बादाम आदि को ही यहां काफी नुकसान हो चुका है। निचले हिमाचल में आम की फसल भी बड़ी मात्रा में तबाह हो चुकी है।
सोलन में ओलावृष्टि से टमाटर की फसल चौपट
टमाटर का करीब डेढ़ अरब का कारोबार करने वाले जिले के किसानों की कमर ओलावृष्टि ने तोड़ दी है। 48 घंटों में हुई ओलावृष्टि से अब तक करीब 65 फीसदी टमाटर की फसल बर्बाद हुई है।
अब तक करीब तीन करोड़ 75 लाख रुपये के नुकसान की पुष्टि हुई है। सोलन में उन्हीं जगहों पर सर्वाधिक ओलावृष्टि हुई है, जहां टमाटर को किसान मुख्य फसल के रूप में बीजते हैं। जिले में कुल 4,414 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर उगाए जा रहे हैं।
चंबा में ओलावृष्टि से बीस प्रतिशत गेहूं की फसल को नुकसान
जिला चंबा में ओलावृष्टि से जहां बीस प्रतिशत गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है, वहीं सेब, प्लम, बंदगोभी और अखरोट से तीस प्रतिशत नुकसान का अनुमान है। अब तक के अनुमान के अनुसार करीब बीस लाख रुपये नुकसान आंका गया है।
कुल्लू में बागवानी धराशायी
जिला कुल्लू के आनी और कुल्लू उपमंडल में पिछले दो दिनों में ओलावृष्टि, बारिश और आंधी-तूफान से सेब, नाशपाती, प्लम को दो करोड़ 24 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। कुल्लू उपमंडल में एक करोड़ 19 लाख रुपये, आनी उपमंडल में एक करोड़ पांच लाख के नुकसान का आकलन है। जिला प्रशासन की ओर से 11 मई तक अलर्ट से बागवान ओलों से चिंतित हैं।
रामपुर में सेब की फसल पर असर
किन्नौर जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में भी मंगलवार और बुधवार को भारी बारिश से सेब और अन्य नकदी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। बागवानी विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक रामपुर उपमंडल में ओलावृष्टि से सेब की फसल को 91.20 लाख का नुकसान का आकलन है।
बारिश और ओलावृष्टि के चलते सेब सहित पलम, बादाम, खुमानी सहित कृषि फसलों को नुकसान पहुंचा है। नेरवा और चौपाल में दो दिन ओलावृष्टि से सेब समेत अन्य नकदी फसलों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
रबी में उगाई जाती हैं 30 फीसदी सब्जियां
जनपद सिरमौर में आंधी-तूफान से आम, सेब, प्लम, लीची, आड़ू समेत तमाम फसलों को 30 से 35 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। जिला भर में फलों को लगभग दो करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई है। बागवानी विभाग ने आला अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट भेज दी है।
हिमाचल में हर साल 77 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों की पैदावार होती है। इस क्षेत्र में 1653.51 हजार मीट्रिक टन सब्जी उत्पादन होता है। सब्जियों में आलू, मटर, टमाटर, फूलगोभी, बंदगोभी, शिमला मिर्च, फ्रासबीन पैदा होती है।
यहां पर कुल पैदावार में से खरीफ के मौसम में 70 फीसदी पैदावार सब्जियां होती हैं, जबकि खरीफ के मौसम में भी कुल पैदावार की करीब 30 फीसदी सब्जियां होती हैं।
इन्हें बेमौसमी सब्जियां कहते हैं। सोलन जिले में टमाटर उगाया जाता है। टमाटर की फसल 80 फीसदी तक तबाह हो चुकी है। फूलगोभी, मटर, खीरा, शिमला मिर्च आदि सब्जियों के भी यही हाल हैं।