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हिमाचल हाईकोर्ट: पौंग विस्थापितों को जमीन नहीं देने पर श्रीगंगानगर के कलेक्टर तलब, कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

Thu, 03 Sep 2026 05:37 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Sep 2026 05:37 PM IST
सार

 हाईकोर्ट ने पौंग बांध विस्थापितों को जमीन उपलब्ध न कराने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

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High Court's stern warning: Strict punitive action will be taken against the Sri Ganganagar Collector if they
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पौंग बांध विस्थापितों को जमीन उपलब्ध न कराने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अधिकारी निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होते हैं तो उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए कड़ी दंडात्मक अथवा बलपूर्वक कार्रवाई की जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश विस्थापितों के पुनर्वास से जुड़े आदेश अनुपालन मामले की सुनवाई के दौरान दिए। सुनवाई के दौरान श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर की ओर से व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए आवेदन पेश किया गया।

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इसमें कहा गया कि राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा हो चुकी है और फिलहाल नामांकन पत्रों की जांच का काम चल रहा है। इस कारण उनका अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना संभव नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि इससे पहले जुलाई में भी संसद के मानसून सत्र का हवाला देते हुए कलेक्टर को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी गई थी। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने इस बार भी छूट प्रदान कर दी, लेकिन साफ कर दिया कि 23 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में जिला कलेक्टर को हर हाल में व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।

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पिछली सुनवाई में राजस्थान सरकार को लगाई थी फटकार
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास में हो रही देरी और उन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में जमीन आवंटित किए जाने पर राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि विस्थापितों को जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाकों में भेजने के बजाय हिमाचल प्रदेश के नजदीक फेज-1 क्षेत्रों में जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

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16,352 विस्थापितों के पुनर्वास का मामला
पौंग बांध के निर्माण के लिए वर्ष 1971 में हिमाचल प्रदेश में भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसके चलते हजारों परिवार विस्थापित हुए। करीब 16,352 पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए राजस्थान के गंगानगर जिले में लगभग 2.20 लाख एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी। हालांकि, जनवरी 2025 के बाद अब तक केवल 50 विस्थापितों को ही जमीन आवंटित किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कई विस्थापितों को अब तक भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला, जबकि कुछ को बंजर जमीन आवंटित की गई या बाद में बेदखल कर दिया गया।

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