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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   High Court takes a strict view of the vertical hill cutting in the Toland area; issues notices to MC Shimla an

शिमला: टॉलैंड क्षेत्र में पहाड़ी की खड़ी कटिंग पर हाईकोर्ट सख्त, एमसी शिमला और सरकार को नोटिस जारी

Thu, 03 Sep 2026 05:32 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Sep 2026 05:32 PM IST
सार

 हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला के टॉलैंड क्षेत्र में नगर निगम शिमला की ओर से की जा रही पहाड़ी की अंधाधुंध खड़ी कटिंग और निर्माण कार्यों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। 

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High Court takes a strict view of the vertical hill cutting in the Toland area; issues notices to MC Shimla an
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला के टॉलैंड क्षेत्र में नगर निगम शिमला की ओर से की जा रही पहाड़ी की अंधाधुंध खड़ी कटिंग और निर्माण कार्यों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु की खंडपीठ ने राज्य सरकार, नगर निगम सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते सरकार को तुरंत मौके का मुआयना करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारी मौके पर जाकर जांच करें कि नगर निगम की कार्रवाई से कुल कितने पेड़ों को नुकसान पहुंचा है और कितने पेड़ खतरे की जद में हैं। अदालत ने कहा कि स्पष्ट किया जाए कि क्या विवादित जमीन वन भूमि के अंतर्गत आती है। मौके पर खड़े पेड़ों की सुरक्षा के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए ने कोर्ट में तस्वीरें पेश करते हुए बताया कि टॉलैंड क्षेत्र में की जा रही वर्टिकल कटिंग के कारण ऊपरी हिस्से में खड़े हरे-भरे देवदार के पेड़ गंभीर खतरे में आ गए हैं। आरोप लगाया गया है कि सड़क के मोड़ पर सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक नाले के बंद होने की आशंका पैदा हो गई है। निर्माण स्थल से निकलने वाले मलबे को तयशुदा डंपिंग साइट पर ले जाने के बजाय कनलोग क्षेत्र में अवैध रूप से फेंका जा रहा है। जिस जमीन पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह प्रकृति से वन भूमि है। इसके लिए उचित अनुमति ली गई थी या नही, और क्या वहां से हरे देवदार के पेड़ों को अवैध रूप से हटाया गया है, इस पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।

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