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Shimla News: फूड पाइप कैंसर का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से पहला ऑपरेशन
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आईजीएमसी के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, सर्जरी के दूसरे दिन ही मरीज ने शुरू कर दिया चलना फिरना
ऑपरेशन के एक हफ्ते बाद ठीक होकर घर भेजा मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में फूड पाइप के कैंसर का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन किया गया। कैंसर सर्जन का दावा है कि हिमाचल में इस तकनीक से किया यह पहला ऑपरेशन है। ऐसे में आने वाले समय में तमाम कैंसर के मरीजों के इसी तरह से ऑपरेशन किए जाएंगे।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में बिलासपुर के रहने वाले 54 साल के मरीज को खाते वक्त भोजन निगलने में दिक्कत आ रही थी। यहां पर कैंसर सर्जन डॉ. रशपाल ठाकुर ने मरीज की प्राथमिक जांच की। इसके बाद एंडोस्कोपी करवाई तो पता चला कि मरीज को फूड पाइप का कैंसर है। इसके बाद मरीज एम्स और पीजीआई भी गया। मरीज हार्ट का पेशेंट है और स्टेंट भी लगा है। ऐसे में मरीज को ऑपरेशन के दौरान होने वाली पेचिदगी के बारे में बताया गया। इसके बाद मरीज दोबारा आईजीएमसी आया। यहां पर 4 फरवरी 2025 को कैंसर सर्जन ने उन्हें दाखिल किया। यह एक हाई रिस्क वाला मरीज था तो ऐसे में चिकित्सक ने काफी एहतियात बरती और आठ फरवरी को ऑपरेशन किया। इसके बाद सोलह फरवरी को मरीज को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया।
आईजीएमसी के कैंसर सर्जन डॉ. रशपाल ठाकुर ने बताया कि पहले भी लेप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन हुए हैं लेकिन इस दौरान बड़ा चीरा देकर आधा ऑपरेशन किया जाता था। यह पहली बार है कि गर्दन, छाती और पेट में पाइप डालने के लिए करीब दो सेंटीमीटर का ही चीरा लगाकर ऑपरेशन लेप्रोस्कोपिक तकनीक से किया। ऑपरेशन करवाने वाली टीम में कैंसर सर्जन डॉ. रशपाल ठाकुर, सर्जरी विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. बाबूराम, डॉ. नीतिश और एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. सबीना शामिल रहीं।
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दूसरे दिन शुरू कर दिया चलना-फिरना
चिकित्सकों का कहना है कि लेप्रोस्कोपिक तकनीक से किए ऑपरेशन से मरीज दूसरे दिन ही चलना फिरना शुरू कर देता है। इसके अलावा चीरे के जरिये मरीजों को होने वाली जटिल समस्याएं भी कम होती हैं। बड़े चीरे से किए जाने वाले ऑपरेशन में मरीजों को निमोनिया होने का खतर रहता है तथा ठीक होने में भी एक महीना लग जाता है।
आईजीएमस 2019 में आए डॉ. रशपाल
कैंसर सर्जन डॉ. रशपाल ठाकुर ने सफरदगंज अस्पताल दिल्ली से एमएस की है। एम्स दिल्ली से सुपर स्पेशलिटी की है। साल 2019 में उन्होंने आईजीएमसी में सेवाएं देना शुरू की थीं। तब से लेकर अब तक करीब 450 के करीब ऑपरेशन वह कर चुके हैं। इनमें लिवर, पेनक्रियाज और ब्रेस्ट कैंसर शामिल हैं। डॉ. रशपाल ठाकुर का दावा है कि अब शायद ही कोई मरीज पीजीआई रेफर किया जाए।
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ऑपरेशन के एक हफ्ते बाद ठीक होकर घर भेजा मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में फूड पाइप के कैंसर का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन किया गया। कैंसर सर्जन का दावा है कि हिमाचल में इस तकनीक से किया यह पहला ऑपरेशन है। ऐसे में आने वाले समय में तमाम कैंसर के मरीजों के इसी तरह से ऑपरेशन किए जाएंगे।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में बिलासपुर के रहने वाले 54 साल के मरीज को खाते वक्त भोजन निगलने में दिक्कत आ रही थी। यहां पर कैंसर सर्जन डॉ. रशपाल ठाकुर ने मरीज की प्राथमिक जांच की। इसके बाद एंडोस्कोपी करवाई तो पता चला कि मरीज को फूड पाइप का कैंसर है। इसके बाद मरीज एम्स और पीजीआई भी गया। मरीज हार्ट का पेशेंट है और स्टेंट भी लगा है। ऐसे में मरीज को ऑपरेशन के दौरान होने वाली पेचिदगी के बारे में बताया गया। इसके बाद मरीज दोबारा आईजीएमसी आया। यहां पर 4 फरवरी 2025 को कैंसर सर्जन ने उन्हें दाखिल किया। यह एक हाई रिस्क वाला मरीज था तो ऐसे में चिकित्सक ने काफी एहतियात बरती और आठ फरवरी को ऑपरेशन किया। इसके बाद सोलह फरवरी को मरीज को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया।
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आईजीएमसी के कैंसर सर्जन डॉ. रशपाल ठाकुर ने बताया कि पहले भी लेप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन हुए हैं लेकिन इस दौरान बड़ा चीरा देकर आधा ऑपरेशन किया जाता था। यह पहली बार है कि गर्दन, छाती और पेट में पाइप डालने के लिए करीब दो सेंटीमीटर का ही चीरा लगाकर ऑपरेशन लेप्रोस्कोपिक तकनीक से किया। ऑपरेशन करवाने वाली टीम में कैंसर सर्जन डॉ. रशपाल ठाकुर, सर्जरी विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. बाबूराम, डॉ. नीतिश और एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. सबीना शामिल रहीं।
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दूसरे दिन शुरू कर दिया चलना-फिरना
चिकित्सकों का कहना है कि लेप्रोस्कोपिक तकनीक से किए ऑपरेशन से मरीज दूसरे दिन ही चलना फिरना शुरू कर देता है। इसके अलावा चीरे के जरिये मरीजों को होने वाली जटिल समस्याएं भी कम होती हैं। बड़े चीरे से किए जाने वाले ऑपरेशन में मरीजों को निमोनिया होने का खतर रहता है तथा ठीक होने में भी एक महीना लग जाता है।
आईजीएमस 2019 में आए डॉ. रशपाल
कैंसर सर्जन डॉ. रशपाल ठाकुर ने सफरदगंज अस्पताल दिल्ली से एमएस की है। एम्स दिल्ली से सुपर स्पेशलिटी की है। साल 2019 में उन्होंने आईजीएमसी में सेवाएं देना शुरू की थीं। तब से लेकर अब तक करीब 450 के करीब ऑपरेशन वह कर चुके हैं। इनमें लिवर, पेनक्रियाज और ब्रेस्ट कैंसर शामिल हैं। डॉ. रशपाल ठाकुर का दावा है कि अब शायद ही कोई मरीज पीजीआई रेफर किया जाए।