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अनिल अंबानी समेत छह कंपनियों के 50 निदेशकों पर एफआईआर, ये है वजह

Tue, 30 Jul 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी/गोहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी/गोहर Published by: Krishan Singh Updated Tue, 30 Jul 2019 05:00 AM IST
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FIRs on 50 directors of six companies including Anil Ambani in mandi himachal
फाइल फोटो

रिलायंस एनर्जी लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अंबानी समेत छह कंपनियों के निदेशक मंडल(बीओडी) के सदस्यों के खिलाफ गोहर थाना में विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

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गोहर के स्यांज क्षेत्र के दो दर्जन प्रभावितों की याचिका की सुनवाई करते हुए उपमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी वत्सला चौधरी के आदेश पर यह कार्रवाई हुई है। आरोप है कि इन कंपनियों ने लोगों की जमीन में जबरन घुसकर बिजली टावर गाड़ दिए। घरों और गोशालाओं के ऊपर बिजली तार बिछा दिए।
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हरे-भरे पेड़ों को भी कटवा दिया।  एफआईआर में रिलायंस एनर्जी लिमिटेड के आठ, पार्वती कोलडैम ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के सात, केईएसी इंटरनेशनल के 10, टाटा पावर के 11, ज्योति स्ट्रक्चर लिमिटेड के चार और कलपत्रू लिमिटेड के 10 डायरेक्टर नामजद किए गए हैं।
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एसपी मंडी गुरदेव सिंह ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर इन पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र रचने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किए गए हैं। सीआरपीसी की धारा 156(3) सेक्शन के तहत एफआईआर दर्ज हुई है।

आईपीसी की धारा 120 बीए145, 182.351, 464.20, 366, 367, 368, 452, 283, 271, 341, 379, 392, 506, 147, 148 व पर्यावरण और भारतीय वन अधिनियम 1986 की धारा 15, 41, 42 व भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा चार के तहत केस दर्ज किया गया है। 

यह है मामला

कुल्लू के सैंज से पंजाब के लुधियाना तक करीब 303 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई गई है। मंडी के गोहर उपमंडल के तहत बहुत से गांवों में यह लाइन बिछाई गई। कंपनियों ने प्रभावित किसानों को उनके मकानों, दुकानों, जमीनों और पशुशालाओं का मुआवजा नहीं दिया।

डिप्टी कमिश्नर मंडी के पास भी इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। शिकायतों पर वर्ष 2017 में मजिस्ट्रेट जांच करवाई गई, जिसकी रिपोर्ट तत्कालीन एसडीएम गोहर राघव शर्मा ने 23 जुलाई 2017 को उपायुक्त मंडी को सौंपी। यह रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

लिहाजा, स्यांज पंचायत के लगभग 24 प्रभावित परिवारों के किसानों ने याचिका दायर की, जिसमें 24 जून को सब जज गोहर वत्सला चौधरी ने आदेश जारी करते हुए मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।

पहले भी दर्ज हो चुके हैं तीन मामले 
वर्ष 2015 में जिला बिलासपुर के सदर थाना और बरमाना थाना में भी बिलासपुर न्यायालय के आदेश पर उक्त निजी कंपनियों के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की गई थीं। इसके खिलाफ निजी कंपनियों ने हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लगभग चार वर्षों तक मामला विचाराधीन रहने के बाद हाईकोर्ट ने उक्त कंपनियों की याचिका को खारिज कर एफआईआर करने के आदेश दिए थे।

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