फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   financial crisis in himachal congress party

हिमाचल कांग्रेस के बुरे दिन, पार्टी संगठन के पास बचे हैं मात्र इतने पैसे

Tue, 09 Jan 2018 12:33 PM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 09 Jan 2018 12:33 PM IST
विज्ञापन
financial crisis in himachal congress party

हिमाचल में सत्ता खोते ही विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस कंगाली के दौर में पहुंच गई है। पार्टी संगठन के पास मात्र पांच लाख बचे हैं। 

विज्ञापन


एक माह बाद पार्टी के पास अपने राज्य कार्यालय राजीव भवन शिमला में कार्यरत दर्जन भर कर्मचारियों की तनख्वाह देने को भी लाले पड़ जाएंगे। उनकी छंटनी करने तक की नौबत आ सकती है। 
विज्ञापन


पार्टी के राज्य कार्यालय को चलाने के लिए न तो हाईकमान और न ही हिमाचल कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायक या अन्य नेता फंड दे रहे हैं। पार्टी के कोष में करीब पांच लाख रुपये बचे हैं। इससे एक-डेढ़ महीने का ही खर्चा निकल पाएगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

ये है कंगाली का कारण

financial crisis in himachal congress party
विधानसभा चुनाव से पहले भी संगठन की माली हालत बहुत पतली ही थी। राज्य में कांग्रेस सरकार थी मगर मंत्री, विधायक आदि जेब ढीली करने को तैयार नहीं हुए। नगर निगम शिमला का छह-सात साल का संपत्ति कर न देने से कांग्रेस दफ्तर डिफाल्टर सूची में शामिल हो गया।

चुनाव से पहले मौके की नजाकत देख कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू ने 400 से ज्यादा टिकटार्थियों से आवेदन के नाम पर करीब 50 लाख रुपये जुटाए लेकिन 23 लाख रुपये नगर निगम को संपत्ति कर देना पड़ा।

शेष 27 लाख रुपये से जैसे-तैसे व्यवस्था चलती रही लेकिन अब महज पांच लाख रुपये ही बचे रह गए हैं। ऐसे में अब कर्मचारियों की तनख्वाहें, बिजली, टेलीफोन आदि के बिल भरना भी मुश्किल हो गया है। 

सुक्खू ने अपनी पेंशन से दो बार भरी लीज मनी : चौहान

financial crisis in himachal congress party

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र चौहान ने कहा कि हर साल एक लाख 28 हजार रुपये लीज के देने होते हैं। 14 कर्मचारियों की मासिक तनख्वाह का खर्चा डेढ़ लाख से ज्यादा है। टेलीफोन का मासिक बिल भी 15 से 20 हजार रुपये आता है।

प्रॉपर्टी टैक्स अलग से देना पड़ता है। कोष में मुश्किल से पांच लाख रुपये बचे हैं। मालूम नहीं, आगे कैसे काम चलेगा। दो बार तो अध्यक्ष सुक्खू अपनी पूर्व विधायक पेंशन से लीज मनी दे चुके हैं। 

खर्चे पूरे करने को फिलहाल हाथ खड़े : नरेश
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान ने चिंता जताई कि एक-दो महीने बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कोष खाली हो जाएगा। तरह-तरह के बिल चुकाने के साथ कर्मचारियों की तनख्वाह देने में मुश्किल आएगी। मुलाजिमों की छंटनी की जा सकती है। राजीव भवन की निचली दो मंजिलें लीज पर देने का विचार किया गया था, जिससे खर्चा निकले, मगर अभी यह भी सिरे नहीं चढ़ा। फिलहाल कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed