हिमाचल कांग्रेस के बुरे दिन, पार्टी संगठन के पास बचे हैं मात्र इतने पैसे
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हिमाचल में सत्ता खोते ही विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस कंगाली के दौर में पहुंच गई है। पार्टी संगठन के पास मात्र पांच लाख बचे हैं।
एक माह बाद पार्टी के पास अपने राज्य कार्यालय राजीव भवन शिमला में कार्यरत दर्जन भर कर्मचारियों की तनख्वाह देने को भी लाले पड़ जाएंगे। उनकी छंटनी करने तक की नौबत आ सकती है।
पार्टी के राज्य कार्यालय को चलाने के लिए न तो हाईकमान और न ही हिमाचल कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायक या अन्य नेता फंड दे रहे हैं। पार्टी के कोष में करीब पांच लाख रुपये बचे हैं। इससे एक-डेढ़ महीने का ही खर्चा निकल पाएगा।
ये है कंगाली का कारण
चुनाव से पहले मौके की नजाकत देख कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू ने 400 से ज्यादा टिकटार्थियों से आवेदन के नाम पर करीब 50 लाख रुपये जुटाए लेकिन 23 लाख रुपये नगर निगम को संपत्ति कर देना पड़ा।
शेष 27 लाख रुपये से जैसे-तैसे व्यवस्था चलती रही लेकिन अब महज पांच लाख रुपये ही बचे रह गए हैं। ऐसे में अब कर्मचारियों की तनख्वाहें, बिजली, टेलीफोन आदि के बिल भरना भी मुश्किल हो गया है।
सुक्खू ने अपनी पेंशन से दो बार भरी लीज मनी : चौहान
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र चौहान ने कहा कि हर साल एक लाख 28 हजार रुपये लीज के देने होते हैं। 14 कर्मचारियों की मासिक तनख्वाह का खर्चा डेढ़ लाख से ज्यादा है। टेलीफोन का मासिक बिल भी 15 से 20 हजार रुपये आता है।
प्रॉपर्टी टैक्स अलग से देना पड़ता है। कोष में मुश्किल से पांच लाख रुपये बचे हैं। मालूम नहीं, आगे कैसे काम चलेगा। दो बार तो अध्यक्ष सुक्खू अपनी पूर्व विधायक पेंशन से लीज मनी दे चुके हैं।
खर्चे पूरे करने को फिलहाल हाथ खड़े : नरेश
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान ने चिंता जताई कि एक-दो महीने बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कोष खाली हो जाएगा। तरह-तरह के बिल चुकाने के साथ कर्मचारियों की तनख्वाह देने में मुश्किल आएगी। मुलाजिमों की छंटनी की जा सकती है। राजीव भवन की निचली दो मंजिलें लीज पर देने का विचार किया गया था, जिससे खर्चा निकले, मगर अभी यह भी सिरे नहीं चढ़ा। फिलहाल कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।