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Shimla News: फीस बढ़ोतरी भी मंजूर नहीं एससीए चुनाव बहाली करं
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15 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव ठुकराया
186 नियुक्तियों की जांच करवाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में फीस बढ़ोतरी के विरोध में मंगलवार को छात्रों ने धरना दिया। विश्वविद्यालय इकाई ने प्रशासन की ओर से प्रस्तावित 15 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी को भी खारिज कर दिया।
छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि फीस में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी भी स्वीकार नहीं की जाएगी। धरने के दौरान कहा गया कि विवि राज्य वित्तपोषित संस्थान है। ऐसे में उसकी आर्थिक कमी का बोझ छात्रों पर डालना उचित नहीं है। छात्रों ने फीस बढ़ोतरी पूरी तरह वापस लेने की मांग की। साथ ही पुनर्मूल्यांकन शुल्क में राहत देने की मांग भी उठाई। आंदोलनकारियों ने 186 शिक्षकों की नियुक्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की। इसके लिए विशेष समिति गठित करने की मांग भी रखी गई। आरोप लगाया गया कि प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण पैदा हुए वित्तीय संकट की भरपाई छात्रों से नहीं कराई जानी चाहिए।
छात्र संघ (एससीए) चुनाव तत्काल बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में लंबे समय से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। इससे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इकाई अध्यक्ष आशीष चौहान और सचिव मुकेश राणा ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य समिति के आह्वान पर आंदोलन को प्रदेशभर में आगे बढ़ाया जाएगा।
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186 नियुक्तियों की जांच करवाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में फीस बढ़ोतरी के विरोध में मंगलवार को छात्रों ने धरना दिया। विश्वविद्यालय इकाई ने प्रशासन की ओर से प्रस्तावित 15 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी को भी खारिज कर दिया।
छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि फीस में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी भी स्वीकार नहीं की जाएगी। धरने के दौरान कहा गया कि विवि राज्य वित्तपोषित संस्थान है। ऐसे में उसकी आर्थिक कमी का बोझ छात्रों पर डालना उचित नहीं है। छात्रों ने फीस बढ़ोतरी पूरी तरह वापस लेने की मांग की। साथ ही पुनर्मूल्यांकन शुल्क में राहत देने की मांग भी उठाई। आंदोलनकारियों ने 186 शिक्षकों की नियुक्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की। इसके लिए विशेष समिति गठित करने की मांग भी रखी गई। आरोप लगाया गया कि प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण पैदा हुए वित्तीय संकट की भरपाई छात्रों से नहीं कराई जानी चाहिए।
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छात्र संघ (एससीए) चुनाव तत्काल बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में लंबे समय से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। इससे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इकाई अध्यक्ष आशीष चौहान और सचिव मुकेश राणा ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य समिति के आह्वान पर आंदोलन को प्रदेशभर में आगे बढ़ाया जाएगा।
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