नौणी विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों की भर्ती में गड़बड़झाला, यहां जानें पूरा मामला
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अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर कई बार विवादों में रहे बागवानी विश्वविद्यालय नौणी में एक बार फिर भर्ती में गड़बड़झाला सामने आया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय में भाई-भतीजावाद अपनाकर वैज्ञानिकों की भर्ती की।
एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि जिस इलाके से उम्मीदवार का चयन किया, उसी से तत्कालीन कुलपति और भर्ती बोर्ड के विशेषज्ञ भी थे। चयनित अभ्यर्थी के शिक्षक ही भर्ती बोर्ड में एक्सपर्ट के तौर पर शामिल थे।
आरोप है कि बोर्ड में शामिल एक ही इलाके के लोगों ने भर्ती से पहले बैठक कर स्कोर कार्ड बदला और संबंधित विभागाध्यक्ष को भी छुट्टी पर भेज दिया। दिलचस्प यह है कि मामला विश्वविद्यालय के ही एक अधिकारी ने उजागर किया है।
इस बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन को भी एक पत्र लिखा है। शिकायत करने वाले अधिकारी का आरोप है कि ऐसी ही पहले भी गड़बड़ी हुई है।विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी ने शिकायत में कहा है कि एक चयनित उम्मीदवार ने तत्कालीन कुलपति के साथ आईसीआरआईएसएटी में दो साल काम किया।
क्या बताते हैं तत्कालीन कुलपति
यानी दोनों के पुराने संबंध हैं। चयनित उम्मीदवार के पिता भी उसी विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं, जहां से इंटरव्यू के लिए विशेषज्ञ बुलाए। विशेषज्ञ कुलपति के साथ इंटरव्यू वाले दिन पहले अलग से बैठे।
इन्होंने इस उम्मीदवार के पक्ष में स्कोर कार्ड बदला। फेक लीड पेंसिल से लिखा स्कोर कार्ड इंटरव्यू बोर्ड के समक्ष रखा। अन्य उम्मीदवारों के लिए इंटरव्यू के नंबर जमा और माइनस/प्लस दो या तीन के मार्जिन पर ही थे, जबकि इस उम्मीदवार को स्कोर में बहुत ऊपर रखा।
इंटरव्यू बोर्ड में एंटोमॉलोजी विभागाध्यक्ष का होना जरूरी था, उन्हें छुट्टी पर भेजा दिया गया। इस पद को किसान विकास केंद्र ताबो जनजातीय क्षेत्र के लिए विज्ञापित किया था, मगर चयनित उम्मीदवार से नौणी विश्वविद्यालय में ही निजी काम लिया जाता रहा।
बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के तत्कालीन कुलपति डा. एचसी शर्मा का कहना है कि एक ही क्षेत्र से होना एक संयोग है। यह सही है कि चयनित अधिकारी उनके साथ आईसीआरआईएसएटी में काम कर चुका है।
हालांकि, डा. शर्मा ने दावा किया कि भर्ती में गड़बड़ी नहीं हुई है, बेशक जांच की जाए। भर्ती बोर्ड विशेषज्ञों की नियुक्ति नियमानुसार हुई है। डा. एचसी शर्मा पिछले दिनों ही सेवानिवृत्त हुए हैं।