यहां खेती कर किसान कमा रहे करोड़ों, 4.72 करोड़ रुपये का सालाना फायदा
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महाराणा प्रताप सागर एवं पौंग बांध के किनारे अवैध तरीके से खेतीबाड़ी कर स्थानीय लोग करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। 24,529 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस बांध के आसपास करीब 402 गांव बसे हैं। वन जीव संरक्षण विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बांध के किनारे करीब 500 परिवार गेहूं की बिजाई समेत अन्य तरह की फसलें उगा रहे हैं।
वर्ष 1961-62 में जब इस बांध का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो 16,100 परिवार इस बांध के बनने से विस्थापित हुए, जिन्हें राजस्थान समेत अन्य जगहों पर भूमि आवंटित की गई। कुछ प्रभावित अभी तक अपने हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। वर्तमान में इस बांध का रखरखाव बीबीएमबी के पास है। जबकि पौंग बांध सेंक्चुरी एरिया प्रदेश सरकार के पास है।
इस बांध पर 66 मेगावाट की क्षमता वाली छह यूनिटें स्थापित हैं, जहां से 396 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। बरसात के मौसम में पहाड़ों से निकलने वाली छोटी-बड़ी खड्डों और नदियों के पानी साथ कई पोषक तत्व बहकर पौंग बांध पहुंच जाते हैं। बरसात के बाद पौंग बांध का जलस्तर घट जाता है। स्थानीय लोग हरित क्रांति साबित हुए इस पौंग बांध के किनारे उपजाऊ जमीन पर खेतीबाड़ी कर लेते हैं।
वाइल्ड लाइफ संरक्षण विभाग की मानें तो इस अवैध खेती से किसानों को सालाना 4.72 करोड़ रुपये की आमदन हो रही है। प्रति व्यक्ति यह आमदन 78730 रुपये सलाना बताई जा रही है। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले पौंग बांध के किनारे घास से ही 82 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
वन्य जीव संरक्षण विभाग के सर्वे के मुताबिक अवैध खेती से वन्य संरक्षण विभाग को नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी जगह मुरब्बे मिलने के चलते अब बांध के किनारे खाली जमीन पर कोई भी परिवार अपना हक नहीं जता सकता। वन्य संरक्षण विभाग शीघ्र इस पर बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है।
-पौंग बांध के किनारे करीब 500 लोग अवैध तरीके से खेतीबाड़ी कर रहे हैं। खेती से किसानों को सालाना 4.72 करोड़ रुपये की आमदन हो रही है। अकेले पौंग बांध के किनारे घास से ही 82 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है। विभाग इस पर शीघ्र सख्त कार्रवाई अमल में लाएगा। - कृष्ण कुमार, वन जीव संरक्षण विभाग हमीरपुर के डीएफओ