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Shimla News: बेवर्ली एस्टेट में मकान खाली करने का आदेश
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शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान स्थित बेवर्ली एस्टेट में किराये पर रह रहे एक व्यक्ति को शिमला के रेंट कंट्रोलर की अदालत ने मकान खाली करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने किरायेदार को बेदखली का आदेश देते हुए 1,48,503 रुपये का बकाया किराया 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित चुकाने का फैसला सुनाया है।
रेंट कंट्रोलर संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने यह फैसला रविंद्र कुमार सूद बनाम हंसराज मामले में सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मकान मालिक को अपने बेटे और उसके परिवार को बसाने के लिए इस जगह की बोनाफाइड जरूरत (वास्तविक आवश्यकता) है। मकान मालिक रविंद्र कुमार सूद ने रेंट कंट्रोलर की अदालत में याचिका दायर कर किरायेदार हंसराज को बेदखल करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि बेवर्ली एस्टेट के आउटहाउस में स्थित करीब 144 वर्ग फुट का यह कमरा उन्हें अपने बेटे और उसके परिवार को बसाने के लिए चाहिए। इसके अलावा किरायेदार पर 14 मई 1996 से किराया न चुकाने का आरोप भी लगाया गया था। अदालत में सुनवाई के दौरान किरायेदार ने मकान मालिक के मालिकाना हक को चुनौती दी थी और दावा किया था कि वह किसी अन्य व्यक्ति को किराया चुका रहा है। हालांकि साक्ष्यों के तौर पर पेश की गई जमाबंदी में रविंद्र कुमार सूद को ही मकान मालिक पाया गया। इसके बाद अदालत ने किरायेदार के इन दावों को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई के बाद रेंट कंट्रोलर ने पाया कि किराएदार ने न तो किराया चुकाने के पुख्ता प्रमाण दिए और न ही मकान मालिक की बोनाफाइड जरूरत को गलत साबित कर पाया। संवाद
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रेंट कंट्रोलर संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने यह फैसला रविंद्र कुमार सूद बनाम हंसराज मामले में सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मकान मालिक को अपने बेटे और उसके परिवार को बसाने के लिए इस जगह की बोनाफाइड जरूरत (वास्तविक आवश्यकता) है। मकान मालिक रविंद्र कुमार सूद ने रेंट कंट्रोलर की अदालत में याचिका दायर कर किरायेदार हंसराज को बेदखल करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि बेवर्ली एस्टेट के आउटहाउस में स्थित करीब 144 वर्ग फुट का यह कमरा उन्हें अपने बेटे और उसके परिवार को बसाने के लिए चाहिए। इसके अलावा किरायेदार पर 14 मई 1996 से किराया न चुकाने का आरोप भी लगाया गया था। अदालत में सुनवाई के दौरान किरायेदार ने मकान मालिक के मालिकाना हक को चुनौती दी थी और दावा किया था कि वह किसी अन्य व्यक्ति को किराया चुका रहा है। हालांकि साक्ष्यों के तौर पर पेश की गई जमाबंदी में रविंद्र कुमार सूद को ही मकान मालिक पाया गया। इसके बाद अदालत ने किरायेदार के इन दावों को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई के बाद रेंट कंट्रोलर ने पाया कि किराएदार ने न तो किराया चुकाने के पुख्ता प्रमाण दिए और न ही मकान मालिक की बोनाफाइड जरूरत को गलत साबित कर पाया। संवाद
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