संरक्षण: हर साल 290 पक्षियों की प्रजातियां बनाती हैं शिमला को अपना घर, पूरे हिमाचल में है इतनी संख्या; जानें
बर्ड काउंट इंडिया के अनुसार शिमला में आज तक 290 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां देखी गई हैं। पूरे हिमाचल में 650 के करीब पक्षियों की प्रजातियां पाई गईं हैं। यहां पक्षी सीजन के अनुसार आवागमन करते रहते हैं। कुछ पक्षी ऐसे भी हैं जो अपना स्थान नहीं बदलते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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हर साल पक्षियों की 290 प्रजातियां शिमला जिले में आती हैं। यह प्रजातियां सीजन के अनुसार शिमला के लिए माइग्रेट करती हैं। समर सीजन में 15 से 20 प्रजातियां शिमला में अपना बसेरा बनाती हैं और सर्दियों में 25 से 30 प्रजातियां शिमला से निचले क्षेत्रों की ओर पलायन करती हैं। इसके अलावा कुछ पक्षी ऐसे भी जो शिमला में ही स्थायी रूप से निवास करते हैं। वन्य प्राणी प्रभाग और वन विभाग बर्ड संरक्षण पर कार्य कर रहा है, इसमें यह जानकारी मिली है। बर्ड काउंट इंडिया के अनुसार शिमला में आज तक 290 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां देखी गई हैं। पूरे हिमाचल में 650 के करीब पक्षियों की प्रजातियां पाई गईं हैं। इस आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिमला का वातावरण पक्षियों के लिए समृद्ध निवास है।
यहां पक्षी सीजन के अनुसार आवागमन करते रहते हैं। कुछ पक्षी ऐसे भी हैं जो अपना स्थान नहीं बदलते हैं। यह पक्षी तिब्बत, चाइना और अन्य ट्रांस हिमालय रेंज से माइग्रेट करके शिमला आते हैं। इनमें स्पैक्टेकलड फिंच, ग्रे हेडिड गोल्ड फिंच और पिंक ब्रॉड रोज फिंच और ग्रे हेडिड गोल्डफिंच सहित कई प्रजातियां शामिल हैं। शिमला में हिमालयन बुलबुल, कौआ और कबूतर सहित कई पक्षी ऐसे हैं जो अपना स्थान नहीं बदलते। शिमला वाटर केचमेंट, खेल हिमालय, मैहली-शोघी बाइपास, पोटरहिल, मशोबरा और नारकंडा में पक्षी काफी संख्या में होते हैं तथा हर साल सैलानी इन्हें देखने के लिए आते हैं। बर्ड काउंट इंडिया के हिमाचल प्रदेश के रीजनल कोआर्डिनेटर संतोष ठाकुर ने बताया कि हिमाचल पक्षियों के लिए एक विशाल बर्डिंग हॉट स्पॉट है। पूरे भारत में 1300 के करीब पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें से 650 प्रजातियां हिमाचल में पाई जाती हैं। इस सूची में शिमला जिला भी शामिल है।
अरण्यपाल वन्यप्राणी वृत्त शिमला दक्षिण आईएफएस अधिकारी प्रीति भंडारी ने बताया कि वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए समय-समय पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों में स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जाती है। फील्ड के अधिकारी समय-समय पर वनों और वन्य प्राणी स्थलों का दौरा करके वन्य जीवों का संरक्षण सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने पक्षी प्रेमियों से आह्वान किया कि वन्य प्राणी सरंक्षण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करते रहें।