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जाग गए देवता, अब पूरा होगा आपका हर काम

Mon, 12 Jan 2015 03:28 PM IST
Updated Mon, 12 Jan 2015 03:28 PM IST
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eve of lohri and makar skranti

14 जनवरी को मकर संक्रांति के बाद मांगलिक कार्य फिर शुरू होंगे। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देवता धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर संक्रांति को देवताओं का दिन माना जाता है। इसलिए मकर संक्रांति से शादी, गृह प्रवेश सहित अन्य मांगलिक कार्य की शुरूआत हो जाएगी। मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल में स्नान, पूजा और दान का विशेष महत्व है। इस दिन तिल और गुड़ का सेवन करना हितकर माना गया है।

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संक्रांति के अवसर पर पवित्र सरोवरों नदियों और घाटों में स्नान का भी विशेष महत्व है। पंचमुखी हनुमान मंदिर केलटी के पुजारी पंडित संजय शास्त्री ने बताया कि सूर्य के दक्षिणायन रहने के दौरान जुलाई से जनवरी के मध्य तक छह महीनों को देवताओं का शयनकाल माना गया है। मकर संक्रांति से देवताओं का जागरण काल शुरू होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से आपके अटके हुए काम बनना शुरू हो जाते हैं। 14 जनवरी को सूर्य देवता धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

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मकर संक्रांति पर अलग- अलग मत

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पंडित संजय शास्त्री के अनुसार सूर्य भगवान 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व भी 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा। 14 जनवरी को पुण्य काल सुबह 4:54 बजे से दोपहर 11:03 बजे तक रहेगा। आचार्य राजेश भारद्वाज के अनुसार सूर्य देवता 14 जनवरी को रात 7:27 बजे धनु राशि से मकर में प्रवेश करेंगे।

इसलिए मकर संक्रांति का पर्व दूसरे दिन मनाया जाएगा। 15 जनवरी को पुण्यकाल सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रहेगा। 13 जनवरी को मनाई जाएगी लोहड़ी- लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी को मनाया जाएगा। लोहड़ी दहन और पूजन का शुभ मुहूर्त सायं 4:23 से 6:03 मिनट तक है।

सूर्य उपासना का पर्व मकर संक्रांति

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मकर संक्रांति का त्योहार मनाना केवल परंपरा नहीं है बल्कि इस दिन सूर्य उपासना को खास महत्व दिया जाता है। शुभ कार्य की शुरूआत के लिए यह दिन उत्तम माना गया है।

पंडित विशाल शर्मा के अनुसार मकर संक्रांति पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। सूर्य साल के बारह महीनों में हर एक राशि में एक माह का समय व्यतीत करता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश होते ही सूर्य उत्तरायण हो जाता है।

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गुड़ और तिल का है खास महत्व

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पंडित योगेंद्र शर्मा के अनुसार सूर्य को पिता तथा शनि को पुत्र माना गया है। गुड़ सूर्य और तिल शनि का प्रतीक है। इसी लिए मकर संक्रांति के दिन तिल तथा गुड़ को विशेष महत्व दिया जाता है। मकर संक्रांति पर पानी में काले तिल और गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद ब्राह्मण को खिचड़ी, काले तिल, ऊनी कपड़े, कंबल, मिठाई, गुड़, घी तथा फलदान करने चाहिए। काले तिल और घी से हवन करना चाहिए।

मकर संक्रांति पर दान का खास महत्व- मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस पर्व पर लोग नदियों तथा घाटों पर स्नान कर भगवान सूर्य की आराधना करते हैं। मकर संक्रांति के दिन तिल तथा गुड़ से बने खाद्य पदार्थों के दान का बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान करने से लोगों को तमाम परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

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