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Shimla: कर्मचारियों, पेंशनरों ने दिया अल्टीमेटम, 15 सितंबर तक मांगों का हल नहीं हुआ तो करेंगे उग्र आंदोलन

Fri, 30 Aug 2024 11:20 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 30 Aug 2024 11:20 AM IST
सार

प्रदेश सचिवालय एवं अन्य संबंध कल्याण संघ ने प्रदेश सचिवालय महासंघ के नेताओं को सरकार की ओर से भेजे नोटिस की कड़ी निंदा की है। 

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Employees and pensioners gave an ultimatum, if their demands are not resolved by September 15, they will stage
हिमाचल प्रदेश सचिवालय - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश सचिवालय एवं अन्य संबंध कल्याण संघ ने प्रदेश सचिवालय महासंघ के नेताओं को सरकार की ओर से भेजे नोटिस की कड़ी निंदा की है। कल्याण संघ के प्रधान मदन लाल शर्मा, उपप्रधान नीलम चौहान और महासचिव भूपराम वर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि संघ प्रदेश सचिवालय महासंघ की ओर से देय और एरियर की मांग का समर्थन करता है। संघ ने सरकार को अल्टीमेटम दिया कि 15 सितंबर तक कर्मचारियों और पेंशनरों के मसलों को नहीं सुलझा पाती है तो भारतीय राज्य महासंघ राज्यपाल को मांगों के समर्थन में ज्ञापन देंगे और उग्र आंदोलन करेंगे।

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सचिवालय महासंघ की ओर से मांगों को लेकर पूरा सहयोग किया जाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इस नोटिस को वापस ले और नेताओं को बैठक के लिए आमंत्रित करे।  उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन एक्ट के प्रावधानों के अनुसार लोकतांत्रिक तरीके से मांगों को रखने का हक सरकारी कर्मचारियों को है। आज तक गेट मीटिंग करने पर कभी भी नोटिस जारी नहीं हुआ था जोकि तर्कसंगत एवं न्यायोचित नहीं है। कल्याण संघ के नेताओं ने कहा कि सरकार ने कर्मचारी और पेंशनरों को बांटने का काम जारी रखा है।
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1.1.2016 से 31.12.2021 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभ संशोधित वेतनमान का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है जबकि 1.1.2022 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सभी लाभ दिए जा रहे हैं जो अन्याय और पक्षपात है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश का कर्मचारी वर्ग एवं पेंशनर इस समय सरकार की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। सरकार फिजूलखर्ची कर रही है। इसके अलावा राजनीतिक नियुक्तियां, सेवानिवृत्त लोगों को पुनः रोजगार, एडिशनल एडवोकेट जनरल की नियुक्तियों के अलावा नामी वकीलों को केस लड़ने सहित सरकारी भवनों के मरम्मत और सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ाें रुपये खर्च किए जा रहे हैं जबकि कर्मचारियों के लिए खजाना खाली की बात करते हैं।

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