बिजली कानून में संशोधन पर भड़की यूनियन, लिया आंदोलन का फैसला
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प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली संशोधन कानून-2018 का विरोध किया है। यूनियन का मानना है कि इससे बिजली क्षेत्र में विपरीत प्रभाव पड़ेंगे। मंगलवार को यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष स्व. ओपी भारद्वाज की 36वीं पुण्यतिथि में कार्यक्रम करवाया गया।
यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा ने कहा कि यूनियन बिजली संशोधन कानून के खिलाफ आंदोलन करेगी। इससे पूर्व बिजली कानून 2003 में विद्युत बोर्ड को विघटित किया गया था। उसके नतीजे सबके सामने हैं। बिजली व्यवस्था में सुधार की जगह घाटे में बढ़ोतरी हो हुई।
प्रस्तावित संशोधन में भी उपभोक्ताओं को ही मार पड़ेगी। क्रॉस सब्सिडी का प्रावधान खत्म होने से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली की दरें आपूर्ति के हिसाब से तय होंगी। इससे बिजली आपूर्ति दरें बढ़ेंगी।
आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण का भी आरोप लगाया
प्रदेश अध्यक्ष ने आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण का भी आरोप लगाया है। कंपनियों ने ईपीएफ में करोड़ों रुपये का गोलमाल किया गया है। उन्होंने प्रबंधक वर्ग से ऐसी कंपनियों को ब्लैक लिस्ट करके साल 2019-20 के लिए सेवा प्रदान करने की निविदा से बाहर करने और 10-12 सालों से काम कर रहे युवाओं को नीति बनाकर बोर्ड में लाने और अनवांटेड मैटीरियल के स्थान पर निचले स्तर पर आवश्यक सामान उपलब्ध करवाने की मांग की।
महासचिव हीरा लाल वर्मा ने कहा कि बिजली बोर्ड में मानव रहित विद्युत उपकेंद्रों की दयनीय स्थिति है। इनमें विभिन्न श्रेणियों के 350 पदों को भरने की भी मांग की। इस मौके पर मुख्य संगठनकर्ता मनोज सूद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जितेंद्र ठाकुर, उपाध्यक्ष सुनीता कुमारी, उप महासचिव जगमेल ठाकुर, सतिंद्र वर्मा, आदर्श भारद्वाज, सलाहकार सतीश शर्मा और ओम प्रकाश शर्मा, सुधीर कुमार, बिधि चंद, हरनाम सिंह, कपिल कुमार और हंसराज मौजूद रहे।