ईडी का दावा, हमारे पास है वीरभद्र के खिलाफ ठोस साक्ष्य
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र द्वारा दायर याचिका को रद्द करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह के खिलाफ ईडी के पास ठोस साक्ष्य है।
ईडी ने हाईकोर्ट में उक्त तर्क रखते हुए कहा कि वीरभद्र सिंह ने एक ही मुद्दे को लेकर अलग-अलग अदालत में याचिका दायर कर रखी है इस आधार पर यह याचिका विचारयोग्य ही नहीं है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी के समक्ष ईडी की और से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल संजय जैन से जवाब दाखिल कर बताया कि याची ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी व संपत्ति जब्ती आदेश को चुनौती दी है।
उन्होंने कहा कि निर्णायक प्राधिकरण को संपत्ति जब्ती के 30 दिन में अपना निर्णय देना होता है लेकिन वीरभद्र ने इसी मुद्दे को लेकर दो याचिकाएं दायर की है जो कानूनन गलत है।
तीन साल में 47 लाख से छह करोड़ हुई आय
उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित अदालत ने अभी संज्ञान नहीं लिया है और जांच आरंभिक स्थिति में है। इसके अलावा दो याचिकाओं पर एक साथ अलग कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि वीरभद्र ने तीन वर्ष के अंतराल में कृषि आय काफी अधिक दिखाई है। उनकी पहले कृर्षि आय 47.35 लाख थी जो मात्र तीन वर्ष में बढ़कर 6.56 करोड़ हो गई। उन्होंने इसी प्रकार अन्य प्रकार से भी आय से अधिक संपत्ति मामले के ठोस साक्ष्य है।
ऐसे में उनकी याचिका खारिज की जाए। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की और से पेश अधिवक्ता कपिल सिब्बल उनकी तरफ से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने उन्हें ईडी द्वारा पेश जवाब पर अपना पक्ष 29 जुलाई तक रखने का समय प्रदान कर दिया।
न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष सुनवाई टली
वीरभद्र सिंह ने न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष अपने खिलाफ जारी कार्रवाई व छापेमारी का आधार जानने के लिए याचिका भी दायर की हुई है। इस मामले की सुनवाई 7 जुलाई तक के लिए टल गई।